अनुच्छेद 35A को लेकर उमर अब्दुल्ला की केंद्र सरकार को चेतावनी, जानिए अनुच्छेद की मुख्य बातें

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अनुच्छेद 35A को लेकर उमर अब्दुल्ला की केंद्र सरकार को चेतावनी, जानिए अनुच्छेद की मुख्य बातें

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  • Publish Date - February 25, 2019 / 12:17 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:27 PM IST

रायपुर। पुलवामा आतंकी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश है, लोगों में पाकिस्तान को लेकर काफी गुस्सा है। इसी के साथ एक मांग ये भी है कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 35 ए को हटाया जाए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह से इस पर सुनवाई भी शुरू हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार आम चुनाव से पहले आर्टिकल 35 ए पर कड़ा स्टैंड अपना सकती है। आर्टिकल 35ए को हटाना बीजेपी का हमेशा से राजनीतिक स्टैंड भी रहा है। हालांकि बीजेपी की सहयोगी जेडीयू और अकाली दल इसकी विरोधी रही हैं।

वहीं, अनुच्छेद 35 A को खत्म किए जाने की अटकलों के बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर उब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ऐसा फैसला करती है तो घाटी में अरुणाचल प्रदेश से भी खराब हालात हो जाएंगे। इतना ही नहीं उब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। केंद्र सरकार और गवर्नर की जिम्मेदारी प्रदेश में चुनाव करवाने भर की है। इसलिए चुनाव ही कराएं, लोगों को फैसला लेने दें। नई सरकार खुद ही आर्टिकल 35A को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करेगी।

क्या है अनुच्छेद 35A?

 

अनुच्छेद 35A से जम्मू-कश्मीर सरकार और वहां की विधानसभा को स्थायी निवासी की परिभाषा तय करने का अधिकार मिलता है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार को ये अधिकार है कि वो आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए शरणार्थियों और अन्य भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में किस तरह की सहूलियतें दे अथवा नहीं दे। आपको बता दें कि अनुच्छेद 35ए को भारतीय संविधान की बहुचर्चित धारा 370 की उपधारा (1) के अंतर्गत ही राष्ट्रपति द्वारा पारित किया गया था।

अनुच्छेद 35A के क्या विशेष अधिकार हैं?

 

अनुच्छेद 35A से जम्मू कश्मीर को ये अधिकार मिला है कि वो किसे अपना स्थाई निवासी माने और किसे नहीं, जम्मू कश्मीर सरकार उन लोगों को स्थाई निवासी मानती है जो 14 मई 1954 के पहले कश्मीर में बसे थे, ऐसे स्थाई निवासियों को जमीन खरीदने, रोजगार पाने और सरकारी योजनाओं में विशेष अधिकार मिले हैं। देश के किसी दूसरे राज्य का निवासी जम्मू-कश्मीर में जाकर स्थाई निवासी के तौर पर नहीं बस सकता, इतना ही नहीं अगर दूसरे राज्यों के निवासी ना कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं, ना राज्य सरकार उन्हें नौकरी दे सकती है,साथ ही अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसके अधिकार छीन लिए जाते हैं।

अनुच्छेद 35A कब और क्यों जोड़ा गया?

 

अनुच्छेद 35A को राष्ट्रपति के एक आदेश से संविधान में साल 1954 में जोड़ा गया था, और ये आदेश तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की कैबिनेट की सलाह पर जारी हुआ था,
इससे दो साल पहले 1952 में नेहरू और शेख अब्दुल्ला का दिल्ली समझौता हुआ था, जिसके अनुसार भारतीय नागरिकता जम्मू-कश्मीर के राज्य के विषयों में लागू करने की बात थी, मगर अनुच्छेद 35 ए को खास तौर पर कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को दिखाने के लिए लाया गया, जिसमें विरोध की दलील ये कि ये राष्ट्रपति आदेश है, जिसे खत्म होना चाहिए। क्योंकि इस पर संसद में कोई चर्चा और बहस नहीं हुई। संसद को बताए बिना 35 ए को ऐसे आदेश के जरिए संविधान में जोड़ दिया गया।

अनुच्छेद 35A पर क्या है विवाद?

  • सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई याचिकाओं में कहा गया है कि धारा 35A भारत की एकात्मता की भवाना के ही प्रतिकूल है क्योंकि इससे भारतीय नागरिकों के अंदर वर्ग के भीतर वर्ग का निर्माण होता है।

  • यह धारा जम्मू-कश्मीर राज्य के अस्थायी नागरिकों को राज्य के अन्दर आजीविका पाने और सम्पत्ति का क्रय करने से रोकती है. अतः यह धारा भारतीय संविधान की धारा 14, 19 और 21 में दिए गये मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।

  • इस धारा के कारण राज्य के अस्थायी निवासी चुनाव नहीं लड़ सकते।

  • अस्थायी नागरिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिलती है और वे इसके लिए किसी न्यायालय की शरण भी नहीं ले सकते हैं।

  • जम्मू-कश्मीर का संविधान विभाजन के समय राज्य में आने वाले शरणार्थियों से सम्बंधित विषयों को “राज्य का विषय” नहीं मानता।

  • धारा 35A को असंवैधानिक रूप से घुसाया गया था क्योंकि संविधान की धारा 368 के अनुसार संविधान में संशोधन केवल संसद ही कर सकती है.अनुसार संविधान में संशोधन केवल संसद ही कर सकती है.अनुसार संविधान में संशोधन केवल संसद ही कर सकती है.

  • धारा 35A का अनुसरण करते हुए जो-जो कानून बने हैं, वे सभी संविधान के भाग 3 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों, विशेषकर धारा 14 (समानता का अधिकार) और धारा 21 (जीवन की सुरक्षा का अधिकार) का उल्लंघन है।

अनुच्छेद 35 ए को खत्म करने के लिए दलील

अनुच्छेद 35 ए के खिलाफ अर्जी लगाने वाले NGO का कहना है कि वो सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की सुनवाई के लिए एक संवैधानिक पीठ बनाने की अपील करेगी। अनुच्छेद 35 ए को हटाने की सबसे बड़ी दलील यही है कि इसे संसद के जरिए लागू नहीं करवाया गया. बल्कि राष्ट्रपति आदेश से जबरन थोपा गया.