कोलकाता, 10 मई (भाषा) शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद शनिवार देर रात अपने गृह नगर पूर्व मेदिनीपुर जिले के कांथी पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। उनके आवास के बाहर हजारों समर्थकों की भीड़ उन्हें बधाई देने के लिए उमड़ पड़ी।
शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेने और पूरे दिन सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद अधिकारी देर रात कालीघाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर कांथी के लिए रवाना हुए।
उनका काफिला देर रात करीब दो बजे कांथी स्थित उनके आवास ‘शांतिकुंज’ पहुंचा, लेकिन देर रात होने के बावजूद शाम से ही इलाके में समर्थकों का जनसैलाब उमड़ा हुआ था।
जैसे ही उनका वाहन इलाके में पहुंचा, समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और उन पर फूलों की बारिश की।
भारी भीड़ के कारण काफिले की रफ्तार धीमी हो गई, जिसके बाद अधिकारी वाहन से बाहर आए और समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया।
इस स्वागत से भावुक दिखे मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर लोगों से घर लौटने की अपील करते हुए कहा, ‘‘अब बहुत देर हो चुकी है, कृपया अपने घर लौट जाएं।’’
पूरा माहौल किसी उत्सव जैसा नजर आ रहा था। स्थानीय लोग अपने ‘‘माटी के बेटे’’ के राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का जश्न मना रहे थे।
घर पहुंचने के बाद अधिकारी ने अपने माता-पिता का आशीर्वाद भी लिया। उनके पिता शिशिर अधिकारी और मां गायत्री अधिकारी देर रात तक उनके स्वागत के लिए जागते रहे।
स्थानीय निवासियों और बचपन के परिचितों ने अधिकारी को दृढ़ निश्चयी और संकल्पवान बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक सफलता के पीछे उनकी मजबूत इच्छाशक्ति तथा निरंतर प्रयास रहे हैं।
सुबह से ही पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर समेत राज्य के अन्य जिलों से लोगों की लंबी कतार उनके कांथी स्थित आवास के बाहर देखी गई। पुलिस और सुरक्षा बल भीड़ को नियंत्रित करने में लगे थे। अधिकतर लोग हाथों में फूल और गुलदस्ते लेकर पहुंचे थे।
राधारानी दास नामक महिला ने कहा, ‘‘मैं नंदकुमार इलाके से आई हूं। ‘दादा’ (शुभेंदु) के मुख्यमंत्री बनने से मैं बेहद खुश हूं। वह बहुत सरल स्वभाव के हैं। जब भी हमारे इलाके में आते थे, मुझसे बात जरूर करते थे। वह बहुत विनम्र इंसान हैं।’’
वहीं, दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर निवासी बिजय नस्कर ने कहा कि वह सुबह से अधिकारी का इंतजार कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं हूं, लेकिन भाजपा का समर्थक हूं। मैं दादा को बधाई देना चाहता हूं और यह भी बताना चाहता हूं कि भाजपा की जीत ने हम जैसे लाखों लोगों को अन्याय के खिलाफ बिना डर के अपनी आवाज उठाने और किसी भी अत्याचार तथा दबंगई के खिलाफ अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की प्रेरणा दी है।’’
भाषा गोला नेत्रपाल
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