तमिलनाडु: सरकारी छात्रावासों के मेन्यू में बीफ शामिल करने के प्रस्ताव पर विवाद, मंत्री ने दी सफाई

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तमिलनाडु: सरकारी छात्रावासों के मेन्यू में बीफ शामिल करने के प्रस्ताव पर विवाद, मंत्री ने दी सफाई

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 07:48 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 07:48 PM IST

चेन्नई, 23 सितंबर (भाषा) सरकारी छात्रावासों के मेन्यू में बीफ शामिल करने के अनुरोध पर राज्य सरकार द्वारा विचार किए जाने संबंधी तमिलनाडु के सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरासु के बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

पुथिया तमिलगम (पीटी) के अध्यक्ष के. कृष्णास्वामी ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए दावा किया कि यह जनभावनाओं के खिलाफ है।

मंत्री के इस ऐलान का कड़ा विरोध करते हुए कृष्णास्वामी ने तर्क दिया कि सरकार द्वारा संचालित छात्रावासों में बीफ परोसना सांस्कृतिक मानदंडों के विपरीत है और इससे कई छात्रों तथा आम जनता की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य के छात्रावासों में पारंपरिक रूप से अंडा, चिकन और मटन दिया जाता रहा है और उन्होंने जोर देकर कहा कि इस नीति को बदलना अनुचित है।

कृष्णास्वामी ने बुधवार को जारी एक वीडियो बयान में घोषणा की, ‘मंत्री वन्नी अरासु को अपना बयान वापस लेना चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। पुथिया तमिलगम पार्टी 30 सितंबर को जिलाधिकारी कार्यालयों और मंत्री के आवास के समक्ष विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी।’

यहां सैदापेट स्थित एम. सी. राजा सामाजिक न्याय छात्रावास का सोमवार शाम को निरीक्षण करने के बाद, अरासु ने पत्रकारों को बताया था कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के एक वर्ग ने चिकन और मटन वाले मौजूदा मेन्यू के साथ मांसाहारी विकल्प के रूप में बीफ शामिल करने का अनुरोध किया है।

जब बुधवार को विल्लुपुरम में पत्रकारों ने मंत्री अरासु से इस पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘हमने मेन्यू में बीफ शामिल करने का कोई फैसला नहीं लिया है। हमने केवल इतना कहा था कि हम छात्रों द्वारा दिए गए ज्ञापन पर विचार करेंगे।’

मंत्री ने कहा, ‘एक मंत्री के रूप में, मैं मौके पर ही किसी अनुरोध को सीधे तौर पर खारिज या स्वीकार नहीं कर सकता। कोई भी अंतिम फैसला व्यक्तिगत रूप से मेरा नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों और छात्रों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद सामूहिक रूप से सरकार का होगा।’

उन्होंने कहा कि कृष्णास्वामी को इस विषय की जानकारी नहीं है।

अरासु ने दावा किया, ‘पूरे देश में बीफ का सेवन किया जाता है। इसका विरोध करना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गोमांस वाली राजनीति का समर्थन करना है।’

उन्होंने कृष्णास्वामी को घटना की पूरी जानकारी के बाद ही प्रतिक्रिया देने की सलाह दी।

भाषा सुमित नरेश

नरेश