चेन्नई, 22 जून (भाषा) तमिलनाडु के मंत्री एन. आनंद ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार पड़ोसी कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना के मामले में कावेरी नदी के पानी पर अपने अधिकारों और खासकर किसानों की आजीविका से जुड़े मामले में कोई समझौता नहीं करेगी।
सरकार के कड़े रुख को दोहराते हुए, ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आजीविका और राज्य के ऐतिहासिक जल अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
आनंद ने कहा कि कर्नाटक की ओर से मेकेदातु बांध परियोजना में फिर से दिलचस्पी दिखाए जाने के बाद टीवीके सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेना, वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा और राष्ट्रीय हरित अधिकरण का रुख करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात की थी और इस परियोजना के प्रति राज्य के विरोध से उन्हें अवगत कराया था।
न्यायाधिकरण के गठन संबंधी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की मांग को विधानसभा में स्वीकार किये जाने के बाद 19 जून को सदन में आम राय से एक प्रस्ताव पारित किया गया।
आनंद ने स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण का गठन एक रणनीतिक कदम था ताकि कर्नाटक और केंद्र सरकार को मेकेदातु बांध परियोजना पर एकतरफा ढंग से आगे बढ़ने से रोका जा सके।
आनंद ने कहा कि सरकार का मानना है कि 2018 के उच्चतम न्यायालय के फैसले से तमिलनाडु का पानी का हिस्सा सुरक्षित हो गया था और कोई भी नया अधिकरण इसे बदल नहीं सकता।
उन्होंने साफ किया कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को खारिज नहीं किया, बल्कि उसे बिना किसी टिप्पणी के केंद्रीय जल आयोग को वापस भेज दिया, जिससे जोखिम बना हुआ है।
तमिलनाडु सरकार मेकेदातु परियोजना का विरोध कर रही है और उसका कहना है कि इससे उसके हितों पर असर पड़ेगा। इस परियोजना का मकसद जल-विद्युत उत्पादन के अलावा पेयजल की बेंगलुरु की जरूरतों को पूरा करना है।
भाषा संतोष अविनाश
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