मंदिर ट्रस्ट ही सीईओ की भूमिका, अधिकार तय करेगा : नृपेंद्र मिश्रा

मंदिर ट्रस्ट ही सीईओ की भूमिका, अधिकार तय करेगा : नृपेंद्र मिश्रा

मंदिर ट्रस्ट ही सीईओ की भूमिका, अधिकार तय करेगा : नृपेंद्र मिश्रा
Modified Date: July 12, 2026 / 03:34 pm IST
Published Date: July 12, 2026 3:34 pm IST

अयोध्या, 12 जुलाई (भाषा) अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि मंदिर के प्रथम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की भूमिका और अधिकारों का निर्धारण श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही करेगा।

मिश्रा ने रविवार को अयोध्या में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनकी पहली जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना होगा कि ट्रस्ट में श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे।

उन्होंने कहा, “नया सीईओ वित्तीय व्यवस्थाओं की देखरेख भी करेगा। ट्रस्ट या उसके सीईओ के कामकाज में सरकार का कोई ‘दखल’ नहीं होगा।”

मिश्रा ने कहा कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं मिलें और ट्रस्ट में उनका भरोसा बना रहे, यह सुनिश्चित करना नये सीईओ की प्रमुख जिम्मेदारियों में से एक होगा।

उन्होंने कहा, “एक तरह से सीईओ बिना किसी सरकारी दखल के ट्रस्ट के सहायक के तौर पर काम करेगा।”

मिश्रा ने बताया कि सीईओ के चयन के लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यों की समिति बनाई है। उन्होंने कहा कि सीईओ को कितने अधिकार देने हैं, यह ट्रस्ट तय करेगा।

मिश्रा के मुताबिक, सीईओ अपने स्टाफकर्मियों का चुनाव खुद करेगा, लेकिन सब कुछ ट्रस्ट के ही अधिकार क्षेत्र में रहेगा।

ट्रस्ट ने छह जुलाई को आयोजित बैठक में सीईओ पद के लिए उम्मीदवारों की जांच-पड़ताल के वास्ते तीन सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की थी। इस समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और एनआईटी रायपुर के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह सीईओ पद के लिए नामों की सिफारिश करने वाली समिति की बैठकों में शामिल होंगे, मिश्रा ने इससे साफ इनकार कर दिया।

राम मंदिर ट्रस्ट में संभावित बदलाव के सवाल पर मिश्राा ने कहा, “मेरी उपस्थिति में कोई निर्णय नहीं लिया गया।” उन्होंने साफ किया कि वह राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई को आयोजित बैठक में शामिल नहीं हुए थे।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह राम मंदिर ट्रस्ट की 22 जुलाई की बैठक में हिस्सा लेंगे, मिश्राा ने कहा, “बैठक 22 जुलाई को है, लेकिन मुझे बैठक का एजेंडा नहीं पता। अगर मामला निर्माण से जुड़ा है, तो मुझे इसमें शामिल होने के लिए आना होगा।”

उन्होंने कहा, “ कृपया समझने की कोशिश करें। हम पदेन सदस्य हैं, जिन्हें वोट देने का कोई अधिकार नहीं है। अब 22 जुलाई की बैठक का एजेंडा जानने के बाद ही मैं तय करूंगा कि उसमें शामिल होना है या नहीं।”

आगामी 22 जुलाई की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, इस बारे में मिश्राा ने कहा कि यह सवाल मंदिर ट्रस्ट के महासचिव से पूछा जाना चाहिए।

राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच मिश्रा ने रविवार को दावा किया कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को कोई शिकायत नहीं है और उन्हें यहां दर्शन करके अच्छा लग रहा है।

उन्होंने कहा, “अगर आप अंगद टीला और सुग्रीव किला के पास श्रद्धालुओं से पूछें कि उन्हें क्या अंतर महसूस हो रहा है, क्या उनके मन में कोई अलग भावना है? तो मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि भगवान राम में उनकी आस्था, मंदिर में की गई व्यवस्थाओं और यहां होने वाली भगवान राम की पूजा को लेकर उनकी कोई शिकायत नहीं है।”

मिश्रा ने कहा, “लोगों से पूछने पर बस एक ही जवाब मिलता है कि भगवान के मंदिर आने से बेहतर और क्या हो सकता है?”

भाषा

सं सलीम पारुल

पारुल


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