पथनमथिट्ठा (केरल), 21 जून (भाषा) केरल में पथनमथिट्ठा के समीप ओमालूर के एक हॉल में रविवार को एक पादरी द्वारा संचालित ईसाई उपासना केंद्र प्रार्थना सभा आयोजित करने वाला था, लेकिन इस आयोजन से पहले ही उसके (हॉल के) बाहर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के चलते तनाव फैल गया।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने यह आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया कि इस संगठन से संबद्ध कर्मचारियों ने 17 साल के एक लड़के के साथ मारपीट की है।
जिले में ‘एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर’ की ओर से आयोजित प्रार्थना सभा के लिए श्रद्धालु हॉल के बाहर बाइबिल लेकर जमा हुए और उन्होंने प्रार्थना के लिए अंदर जाने देने की अनुमति मांगी।
भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं समेत प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे धार्मिक उपासना के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि धार्मिक गतिविधियों की आड़ में होने वाले कथित शोषण और क्रूरता का विरोध कर रहे हैं।
जब दोनों गुट सेंटर के बाहर जमा हो गये तब पुलिस को हालात पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में, श्रद्धालुओं को प्रार्थना हॉल के परिसर में जाने और प्रार्थना करने की इजाजत दे दी गई।
यह विरोध-प्रदर्शन उस पुलिस जांच के बाद हो रहा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ‘एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर’ के कर्मचारियों ने वहां रह रहे एक किशोर के साथ मारपीट की थी।
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की आरंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि केंद्र में रह रहे दूसरे बच्चों के साथ भी शायद ऐसा ही हुआ हो।
पुलिस ने शनिवार को इस मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया। आरोपियों की पहचान संस्थान के प्रबंधक रेजी तथा कर्मचारियों बेनी और सिजू के तौर पर हुई है।
पुलिस के मुताबिक, इडुक्की जिले के अनाकारा का 17 साल का लड़का पिछले कुछ महीनों से इस केंद्र में रह रहा था। उसे परिवार की आर्थिक तंगी के कारण उसकी पढ़ाई और भविष्य में नौकरी के लिए मदद का वादा किया गया था।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि लड़के को पढ़ाई-लिखाई में कोई मदद नहीं दी गई, बल्कि उससे संस्थान में काम करवाया गया।
पुलिस ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
इस बीच, भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि लोगों का शोषण किया जा रहा था और कमज़ोर लोगों को आर्थिक फ़ायदे के लिए वृद्धाश्रम और संगठन से जुड़े दूसरे संस्थानों जैसी जगहों पर लाया जा रहा था।
केंद्र से जुड़े श्रद्धालुओं ने आरोपों का खंडन किया।
भाषा राजकुमार सुरेश
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