बागलकोट (कर्नाटक), 20 फरवरी (भाषा) बागलकोट में शुक्रवार को तनावपूर्ण स्थिति बनी रही क्योंकि निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद कई लोग सड़कों पर उतर आए और मांस की दुकानों पर कथित तौर पर पथराव किया, जिसके चलते पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। यह जानकारी पुलिस ने दी।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिद्धार्थ गोयल ने बताया कि शोभायात्रा बृहस्पतिवार को अपराह्न करीब 3:30 बजे पुराने कस्बे से शुरू हुई थी और लगभग पूरी होने वाली थी, तभी नवनागर क्षेत्र के किला ओनी में एक मस्जिद के पास रात करीब 9:30 बजे पथराव की घटना हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘मस्जिद में जूता रखने का एक स्टैंड था और उसे खड़ा रखने के लिए उसके नीचे दो पत्थर रखे गए थे। उन्हीं पत्थरों में से एक का इस्तेमाल हुआ और वह हमारे पुलिसकर्मियों पर गिरा। किसी को गंभीर चोट नहीं आई।’’
वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, तनजीर को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
गोयल ने कहा, ‘‘वीडियो फुटेज में वह पत्थर फेंकते हुए देखा जा सकता है। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि केवल एक व्यक्ति ने पत्थर फेंका। लाठी या किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया।’’
सात अन्य लोगों को पुलिसकर्मियों को उनके कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत, जिनमें गैरकानूनी सभा, दंगा, हत्या का प्रयास, किसी लोक सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग और शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना शामिल है, के तहत स्वतः ही एक प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
एसपी ने कहा, ‘‘हमने तनजीर समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस घटना के बाद शोभायात्रा शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ी। दोनों समुदायों के नेताओं ने हमारा सहयोग किया। एहतियात के तौर पर हमने निषेधाज्ञा लागू कर दी है। स्थिति नियंत्रण में है।’’
वीडियो साक्ष्य के आधार पर आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है और स्थिति नियंत्रण में है।
उन्नीस फरवरी की मध्यरात्रि से 24 फरवरी की मध्यरात्रि तक बागलकोट के कुछ हिस्सों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर चार से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि साथ ही खतरनाक हथियार ले जाने, सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में लिप्त होने और बिना पूर्व अनुमति के सभा, समारोह या धरने आयोजित करना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपाय किए गए हैं।
शुक्रवार सुबह तनाव तब उत्पन्न हो गया जब युवाओं के एक समूह ने प्रदर्शन किया, एक जुलूस निकाला, नारेबाजी की और पथराव किया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद शांति भंग हुई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया।
उत्तरी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक चेतन सिंह राठौर स्थिति का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य नारायणसा के. भंडगे ने कांग्रेस सरकार पर ‘हिंदू विरोधी’ होने का आरोप लगाया और कहा कि इसलिए लोगों को उनसे न्याय की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि कस्बे में जल्द ही एक और जुलूस निकाला जाएगा। भाजपा सांसद ने सवाल उठाया कि मस्जिद में 200 से अधिक लोगों की भीड़ क्यों थी।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश