अदालत ने पुलिस जांच में विसंगति का हवाला देकर जबरन वसूली मामले में आरोपी को जमानत दी

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अदालत ने पुलिस जांच में विसंगति का हवाला देकर जबरन वसूली मामले में आरोपी को जमानत दी

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 07:33 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 07:33 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने कारोबारी से 20 लाख रुपये की रंगदारी वसूलने के लिए उसके घर पर कथित रूप से गोलियां चलाए जाने के मामले में इस मकान की अवस्थिति (लोकेशन) एवं तस्वीरें भेजने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दे दी।

अदालत ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में अहम सबूतों के बारे में ‘पूरी तरह से विरोधाभासी बातें’ कही हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी आरोपी अनूप सिंह ऊर्फ अन्नू सेजवाल की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। सेजवाल को 11 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और वह चौथी बार ज़मानत की मांग कर रहा था। यह मामला हथियार कानून की धाराओं के अलावा, गैर-इरादतन हत्या की कोशिश, चोट पहुंचाने, आपराधिक साज़िश और समान मंशा से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है।

अदालत ने 17 अगस्त के एक आदेश में कहा, ‘‘हालांकि बीएनएस की धारा 308(4) और 125 के तहत हथियारों से जुड़े अपराध की गंभीरता को कम करके नहीं आंका जा सकता, लेकिन जब जांच की ज़रूरत खत्म हो गई हो, तो सिर्फ़ अपराध की गंभीरता के आधार पर नियमित जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता।’’

अभियोजन पक्ष के अनुसार एक जून को लाडो सराय में शिकायतकर्ता महावीर सिंह सेजवाल के घर के बाहर गोलियां चलाई गईं और उसके बाद अपशब्द कहे गए एवं जान से मारने की धमकी दी गई। बाद में, कथित तौर पर एक सह-आरोपी ने शिकायतकर्ता को व्हाट्सएप पर फोन किया और 20 लाख रुपये की मांग की, पैसे न देने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों ने खुलासा किया था कि सिंह ने शिकायतकर्ता की आर्थिक स्थिति और फिरौती की रकम चुकाने की क्षमता के बारे में जानकारी दी थी।

अदालत ने कहा कि यह आरोपी की चौथी जमानत अर्ज़ी थी तथा पुलिस ने तीन हफ़्तों के भीतर दो विरोधाभासी बातें कर ‘साफ़ तौर पर संदिग्ध आचरण’ दिखाया है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अदालत को स्थानीय पुलिस के उस बेहद आपत्तिजनक और संदिग्ध व्यवहार पर गौर करना पड़ रहा है, जिसमें उसने तीन हफ़्ते के अंदर ही इस अदालत के सामने दो उलट बातें रखीं।’’

अदालत ने गौर किया कि पहले की एक स्थिति रिपोर्ट में पुलिस ने आरोप लगाया था कि एक अहम गवाह को जान से मारने की धमकी दी गई थी और आरोपी डिजिटल तरीके से पुलिस की गतिविधियों पर नज़र रख रहा था। हालांकि, 12 अगस्त को दाखिल की गई रिपोर्ट में इन आरोपों और गवाह के बयान का कोई जिक्र नहीं था।

भाषा राजकुमार अविनाश

अविनाश