न्यायालय नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने संबंधी याचिका पर एक सितंबर को सुनवाई करेगा

न्यायालय नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने संबंधी याचिका पर एक सितंबर को सुनवाई करेगा

न्यायालय नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने संबंधी याचिका पर एक सितंबर को सुनवाई करेगा
Modified Date: August 31, 2026 / 06:54 pm IST
Published Date: August 31, 2026 6:54 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार की ओर से दायर उस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की उस दलील पर संज्ञान लिया, जिसमें उन्होंने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।

दिन की कार्यवाही जब समाप्त होने वाली थी, तभी मेहता ने कहा, ‘‘हम एक आईए (हस्तक्षेप याचिका) दाखिल करना चाहते हैं। यह प्रदर्शन से जुड़ी प्राथमिकी रद्द करने से संबंधित है…हम संविधान के अनुच्छेद 142 का हवाला दे रहे हैं।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो रहा है, तो उसे कोई आपत्ति नहीं है और उसने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने दिल्ली में विरोध मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र ने परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ 36 दिन तक चले उसके आंदोलन को वापस लेने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया है।

कॉजपा के अनुसार, यह मार्च शिक्षक दिवस के दिन निकाला जाएगा। इसमें उन छात्रों के परिवार शामिल होंगे, जिन्होंने नीट परीक्षा रद्द होने और बाद में दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा, जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवार भी मार्च में शामिल होंगे।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति गठित की थी। समिति को नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ देशभर में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों और आरोपों की जांच करनी थी, जिनमें छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोप भी शामिल थे।

तीन अगस्त को शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने संबंधी उसके आदेश में इस्तेमाल किए गए शब्द ‘‘आपराधिक पृष्ठभूमि’’ का मतलब केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों से है। अदालत ने कहा था कि राज्य सरकारें कानून के मुताबिक बाकी छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी बंद या वापस ले सकती हैं।

यह स्पष्टीकरण केंद्र की उस दलील के बाद आया था, जिसमें उसने कहा था कि वह नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को आगे नहीं बढ़ाने को लेकर ‘‘गंभीर’’ है बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। इसमें 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित ‘संसद मार्च’ भी शामिल था।

दिल्ली में 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई थीं। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।

छात्रों के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों का असर कई शहरों तक पहुंचा था। इनका मुख्य मुद्दा तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग था।

बीस जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ आंदोलन 25 जुलाई को तब खत्म कर दिया गया, जब प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और सरकार ने कॉजपा की दूसरी मांगें मान लीं।

भाषा आशीष माधव

माधव


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