सम्पत्ति का सबसे बड़ा सौन्दर्य है उसका समाज के लिए समर्पण: उपमुख्यमंत्री बैरवा

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सम्पत्ति का सबसे बड़ा सौन्दर्य है उसका समाज के लिए समर्पण: उपमुख्यमंत्री बैरवा

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  • Publish Date - June 29, 2026 / 09:17 PM IST,
    Updated On - June 29, 2026 / 09:17 PM IST

जयपुर, 29 जून (भाषा) राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने सोमवार को कहा कि राज्य की पहचान अब केवल उसके किलों से नहीं, बल्कि विद्यालयों और बालिकाओं की प्रगति से होगी।

वह यहां शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाले 276 से अधिक दानदाताओं के सम्मान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे।

यहां बिड़ला ऑडिटोरियम में 30वें राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह में 2025-26 के दौरान शिक्षा के लिए 318 करोड़ रुपये का योगदान देने वाले 276 से अधिक दानदाताओं, प्रेरकों और प्रवासी भारतीय (एनआरआई) सहयोगकर्ताओं को सम्मानित किया गया।

बैरवा ने कहा कि भामाशाह सम्मान समारोह का दिन केवल सम्मान का दिन नहीं है बल्कि आत्मा के उत्सव का दिन है, संस्कृति का उत्सव है। उन्होंने कहा कि सम्पत्ति का सबसे बड़ा सौन्दर्य है उसका समाज के लिए समर्पण।

उन्होंने कहा,‘‘राजस्थान केवल वीरों की भूमि ही नहीं, बल्कि महान दानवीरों की भी भूमि है। यहां तलवार के साथ ही त्याग भी देखने को मिलता है। धन कमाना व्यक्ति की क्षमता का परिचायक हो सकता है, लेकिन उसे समाज के हित में खर्च करना उसकी महानता को दर्शाता है।’’

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि मेवाड़ की शौर्य गाथा महाराणा प्रताप और भामाशाह के योगदान के बिना अधूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को मजबूत बनाने में दान और परोपकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने दानदाताओं के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके सहयोग से बीकानेर के जयमलसर में राजकीय बालिका सैनिक विद्यालय का निर्माण हो रहा है।

दिलावर ने कहा कि राज्य में विद्यालय अब अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से आधुनिक बन रहे हैं तथा पारंपरिक ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड लगाए जा रहे हैं।

दानदाताओं की सुविधा के लिए उन्होंने एक विशेष प्रकोष्ठ (सेल) गठित करने की घोषणा की, जिससे दान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल होगी। अब विद्यालय प्रबंधन समितियों में दानदाताओं के दो प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) राजेश यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री विद्यादान निधि और ज्ञान संकल्प पोर्टल जैसी पहल के माध्यम से दान प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है, जिससे शिक्षा के विकास में अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो रही है।

समारोह में 49 भामाशाह को ‘शिक्षा विभूषण’, 105 भामाशाहों को ‘शिक्षा भूषण’ सम्मान प्रदान किया गया, जबकि 99 प्रेरकों को भी सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में 23 प्रवासी भारतीय (एनआरआई) दानदाता भी शामिल रहे।

भाषा बाकोलिया राजकुमार

राजकुमार