नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) जनता दल (यूनाइटेड) ने बृहस्पतिवार को कहा कि बीते करीब बारह साल में शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव हुआ है, शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ी है तथा शिक्षा की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या कहीं न कहीं छात्रों को परेशान करती रही है।
राज्यसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा में भाग लेते हुए जद (यू) के संजय झा ने कहा कि किसी भी देश के विकास में वहां की शिक्षा व्यवस्था का अहम योगदान होता है। उन्होंने कहा कि विकास के पथ पर भारत आज जिस तरह बढ़ रहा है उसका एक अहम कारण यह है कि बीते करीब बारह साल में शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव हुआ है और शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ी है तथा शिक्षा की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा ‘‘लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या कहीं न कहीं छात्रों को परेशान करती रही है।’’
झा ने कहा कि कोई भी विद्यार्थी जब परीक्षा देता है तो उसके पीछे उसकी बरसों की मेहनत, उसके अभिभावकों का श्रम और परिवार का त्याग जुड़ा होता है। ‘‘ऐसे में अगर संस्थाओं से विश्वास टूटे तो बेहद दुखद होता है।’’
उन्होंने कहा ‘‘हमें यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या नयी नहीं है। यह सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है लेकिन इसकी कीमत छात्रों ने चुकाई है।’’
झा ने कहा कि इस समस्या का समाधान खोजना ही होगा क्योंकि परीक्षा माफिया हालात का पूरा फायदा उठा रहा है। ‘‘यह विधेयक इस समस्या का समाधान बताता है।’’
उन्होंने कहा कि ‘कांग्रेस के नए सलाहकार’ ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित अपने लेख में लोकतंत्र के सारे रास्ते बंद होने की बात कही है। ‘‘उन्हें देखना चाहिए कि आंदोलन हुआ, प्रधानमंत्री ने स्थिति की खुद निगरानी की और सरकार के एक मंत्री ने इस्तीफा दिया। अगर लोकतंत्र के रास्ते बंद होते तो ऐसा नहीं होता।’’
जद (यू) सदस्य ने कहा ‘‘सदन में बार-बार गृह मंत्री की बात हो रही है। गृह मंत्री को जांच कर यह पता लगाना चाहिए कि छात्रों के आंदोलन को लेकर किन लोगों ने राजनीति करने की कोशिश की और किन लोगों ने आंदोलन को ‘हाईजैक’ करना चाहा।’’
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश