चेन्नई, 12 मई (भाषा) तमिलनाडु में विपक्षी दल अन्नाद्रमुक में मंगलवार को दरार और गहरी हो गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं एस. पी. वेलुमणि और सी. वी. षणमुगम के नेतृत्व में विधायकों के एक धड़े ने पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी पर बड़ा आरोप लगाया कि वह द्रमुक से हाथ मिलाना चाह रहे थे।
विधायकों के इस धड़े ने दावा किया कि पलानीस्वामी अभिनेता विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को सत्ता से दूर रखने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वी द्रमुक (द्रविण मुनेत्र कषगम) के साथ हाथ मिलाना चाहते थे।
इसके साथ ही अन्नाद्रमुक के दोनों वरिष्ठ विधायकों के नेतृत्व वाले इस गुट ने सी. जोसफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार को अपना समर्थन देने का भी ऐलान किया है। टीवीके सरकार बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी।
राज्य में 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में 164 सीट में से केवल 47 सीटें जीतने के बाद अन्नाद्रमुक के दोनों वरिष्ठ नेताओं सहित लगभग 30 विधायक उस खेमे में हैं जो पलानीस्वामी के नेतृत्व का विरोध कर रहे हैं।
हालांकि, पार्टी ने पलानीस्वामी की आलोचना करने वाले प्रतिद्वंद्वी खेमे के विधायकों पर पलटवार किया और द्रमुक के साथ हाथ मिलाने की उनकी इच्छा की खबरों को ‘अफवाह’ बताया।
एमजीआर द्वारा स्थापित अन्नाद्रमुक में इस अंदरूनी कलह ने पार्टी में एक और विभाजन की अटकलों को जन्म दे दिया है। यह स्थिति वर्ष 1987 में एमजीआर की मृत्यु के बाद और दिसंबर 2016 में मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद भी उत्पन्न हुई थी।
वेलुमणि और षणमुगम के नेतृत्व वाले खेमे ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को समर्थन देने का निर्णय लिया है।
षणमुगम ने पत्रकारों से कहा कि वे आज मुख्यमंत्री विजय से मिलकर उनकी सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र सौंपेंगे।
अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेताओं ने पलानीस्वामी से चुनावी हार के कारणों पर गहन विचार-विमर्श करने और भविष्य में पार्टी को मजबूत करने के लिए पार्टी की महापरिषद की बैठक बुलाने का आग्रह किया है।
षणमुगम ने दावा किया, ‘हालांकि, पलानीस्वामी द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाना चाहते थे।’
उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रस्ताव अन्नाद्रमुक के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है।’’
अन्नाद्रमुक का गठन द्रमुक का विरोध करने और उसे ‘जड़ से उखाड़ने’ के उद्देश्य के साथ किए जाने की बात दोहराते हुए वरिष्ठ नेता षणमुगम ने मंगलवार को दावा किया कि पार्टी के सभी सदस्यों ने एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाले दल के समर्थन से सरकार बनाने के पलानीस्वामी के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि पार्टी को अब एक नयी शुरुआत की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अम्मा (जयललिता) का शासन वापस आना चाहिए, इसलिए टीवीके को समर्थन मिलना चाहिए। विधायकों ने वेलुमणि को सदन में अपना नेता चुना है।
इस बीच, अन्नाद्रमुक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘क्या द्रमुक के साथ गठबंधन की अफवाहों को मीडिया में उछालना ही आपकी योजना थी? अगर ऐसा है, तो ऐसी खबरें हैं कि आप तीनों (वेलुमणि, षणमुगम और सी. विजयभास्कर) टीवीके सरकार में मंत्री पद के लिए गुहार लगा रहे हैं। क्या आप इन खबरों को स्वीकार करते हैं?’
अन्नाद्रमुक ने कहा कि उन्हें गठबंधन संबंधी निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं था।
पोस्ट में स्पष्ट किया गया, ‘पार्टी कार्यकर्ताओं ने अब पूरी तरह से (पलानीस्वामी के साथ रहने का) फैसला कर लिया है।’
भाषा प्रचेता वैभव
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