नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) संसद के बजट सत्र के सोमवार से शुरू होने वाले दूसरे चरण के हंगामेदार रहने की संभावना है। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष द्वारा प्रायोजित उस प्रस्ताव पर चर्चा होनी है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने की मांग की गई है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा सकता है, क्योंकि विपक्ष पहले से ही ईरान के प्रति सरकार के रुख, भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका द्वारा दी गई “छूट” और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला कर रहा है।
रविवार शाम को जारी की गई लोकसभा की नौ मार्च की संशोधित कार्यसूची के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर लोकसभा में ‘पश्चिम एशिया की स्थिति’ के संबंध में बयान देंगे।
इसके अलावा, चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के परिणाम, जिसके कारण लगभग 60 लाख नाम हटा दिए गए, का भी संसदीय कार्यवाही पर असर पड़ने की आशंका है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए शुल्क के खिलाफ दिए गए फैसले के मद्देनजर विपक्ष के भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए जाने की संभावना है।
बजट सत्र के दूसरे भाग में 2026-27 के लिए विभिन्न मंत्रालयों के अनुदान की मांगों और वित्त विधेयक, 2026 को पारित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें एक फरवरी को केंद्रीय बजट में प्रस्तुत सभी कर प्रस्ताव शामिल हैं।
संसद के दोनों सदन पांच-पांच मंत्रालयों के कामकाज और अनुदान संबंधी मांगों पर भी चर्चा करेंगे।
बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कई विपक्षी नेताओं द्वारा लाया गया है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उन्होंने सदन में “स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण” तरीके से काम किया।
उन्होंने अध्यक्ष पर लोकसभा में कुछ “अप्रत्याशित कार्रवाई” की बात करते हुए कांग्रेस सदस्यों के खिलाफ कुछ झूठे दावे कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने के लिए सदन में न आने का अनुरोध करने का भी आरोप लगाया था।
बिरला ने नोटिस प्रस्तुत किए जाने की तारीख से सदन की कार्यवाही से खुद को अलग कर लिया था। लोकसभा सचिवालय ने कहा था कि वह एजेंडा के निपटारे के बाद ही लौटेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को बिरला का समर्थन करते हुए कहा कि वह सभी सांसदों को साथ लेकर चले हैं और संविधान व संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के लिये प्रतिबद्ध हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के अलावा, ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, जिसके कारण कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान और कीमतों में वृद्धि हुई है, पर भी सत्र के दौरान चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष द्वारा इस मामले पर सरकार की नीति पर सवाल उठाने की संभावना है।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सदन में एसआईआर मामले को उठाने के लिए तैयार हैं, जबकि भाजपा शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पश्चिम बंगाल की यात्रा के दौरान “प्रोटोकॉल उल्लंघन” के मुद्दे को उठा सकती है।
बजट सत्र के शेष भाग में सरकार द्वारा विद्युत संशोधन विधेयक को भी पेश किए जाने की उम्मीद है, साथ ही सत्र के पहले भाग से लंबित अन्य विधायी कार्यों पर भी विचार किया जाएगा।
सोमवार की कार्य सूची के अनुसार, अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विदेश मंत्री जयशंकर का बयान लोकसभा के दिन की कार्यसूची में शामिल हैं।
सत्ताधारी भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के दौरान सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है।
विपक्षी दल सोमवार को सुबह 10 बजे राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में एक रणनीतिक बैठक भी करेंगे।
आंकड़े सरकार के पक्ष में हैं, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रस्ताव खारिज हो जाएगा।
कांग्रेस ने 118 सांसदों द्वारा दिए गए नोटिस पर बहस का आह्वान किया है।
तृणमूल कांग्रेस ने भी कहा है कि वह बिरला के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करेगी।
संभव है सोमवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच लोकसभा में प्रश्नकाल न हो, क्योंकि कार्यवाही को शिलांग से वर्तमान सदस्य रिकी सिंग्कॉन को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए स्थगित किया जा सकता है, जिनका 19 फरवरी को निधन हो गया था।
तीन लोकसभा अध्यक्षों – जी.वी. मावलंकर (1954), हुकम सिंह (1966) और बलराम जाखड़ (1987) – को अतीत में अविश्वास प्रस्तावों का सामना करना पड़ा था, जिन्हें सदन द्वारा खारिज कर दिया गया था।
भाषा प्रशांत नरेश
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