युवक ने अपनी बीमार दादी को बचाने के लिए यकृत का एक हिस्सा दान किया

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युवक ने अपनी बीमार दादी को बचाने के लिए यकृत का एक हिस्सा दान किया

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  • Publish Date - April 19, 2026 / 11:19 PM IST,
    Updated On - April 19, 2026 / 11:19 PM IST

नोएडा, 19 अप्रैल (भाषा) बिहार के 19 वर्षीय एक युवक ने उदारता और गहरे स्नेह का परिचय देते हुए अपनी 62 वर्षीय दादी को बचाने के लिए अपने यकृत का एक हिस्सा दान किया। इसके लिए उसने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा भी छोड़ दी।

आदित्य राज अपनी दादी सुनीता देवी के लिए दाता के रूप में स्वेच्छा से आगे आया। सुनीता देवी पिछले एक साल से लीवर सिरोसिस से जूझ रही थीं। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसमें बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, पेट में तरल पदार्थ जमा हो जाता है और शारीरिक कमजोरी बढ़ती जाती है।

वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि जैसे-जैसे उनकी हालत बिगड़ती गई, विस्तृत चिकित्सा मूल्यांकन से पुष्टि हुई कि यकृत प्रतिरोपण ही एकमात्र निश्चित उपचार विकल्प है।

परिवार का कोई अन्य सदस्य चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त न पाए जाने पर आदित्य आगे आया। डॉक्टरों के अनुसार, बाद में उनकी व्यापक चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक और कानूनी जांच की गई और राष्ट्रीय प्रत्यारोपण प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें दान के लिए उपयुक्त घोषित किया गया।

मैक्स हेल्थकेयर के यकृत और पित्त विज्ञान केंद्र के समूह अध्यक्ष सुभाष गुप्ता ने कहा, ‘‘यह भावनात्मक रूप से मार्मिक होने के साथ-साथ चिकित्सकीय रूप से भी जटिल मामला था।’’

उन्होंने बताया कि मरीज यकृत की बीमारी की उन्नत अवस्था में थी और उसमें स्वास्थ्य संबंधी जटिलता पैदा हो गई थी, जिसके कारण समय पर प्रतिरोपण बेहद जरूरी था। वहीं, शैक्षणिक प्रतिबद्धताओं के बावजूद युवा दाता का दृढ़ संकल्प सराहनीय था।

डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी के बाद सुनीता देवी की हालत में लगातार सुधार देखा गया। प्रतिरोपण के 14 दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं, आदित्य राज भी सर्जरी के बाद स्वस्थ हो गए और अब उन्होंने अपनी सामान्य दिनचर्या फिर से शुरू कर दी है।

भाषा आशीष रंजन

रंजन