कोझिकोड (केरल), 27 जून (भाषा) केरल के उद्योग मंत्री पी. के. कुन्हालिकुट्टी ने शनिवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खनिज बालू के निजीकरण की अनुमति नहीं देगी और दुर्लभ खनिजों के नए खनन को भी मंजूरी नहीं दी जाएगी।
कुन्हालिकुट्टी ने यह भी कहा कि कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर में प्रस्तावित कटौती तथा पीएम श्री योजना पर अंतिम निर्णय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के भीतर चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
यूडीएफ सरकार के बजट प्रस्तावों और कुछ फैसलों को लेकर जारी विवाद के बीच पत्रकारों से बातचीत में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के वरिष्ठ नेता कुन्हालिकुट्टी ने कहा कि बजट में शामिल कुछ प्रस्ताव पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई पहलों के क्रम में हैं।
उन्होंने राज्य बजट में घोषित ‘साउथ केरल क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर’ को निजी खनन को बढ़ावा देने की योजना बताए जाने के आरोपों को खारिज किया।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी कोई नीति नहीं है। यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि खनिज बालू का निजीकरण नहीं किया जा सकता। यह सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित है और आगे भी रहेगा। इसमें किसी तरह का कोई सवाल ही नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ यदि निजीकरण या नए खनन की कोई संभावना सामने आती है, तो यूडीएफ इसकी अनुमति नहीं देगा। हम सभी प्रस्तावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे और उसके बाद अपनी नीति की घोषणा करेंगे। लेकिन मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि न नया खनन होगा और न ही निजीकरण।’’
कुन्हालिकुट्टी ने कहा कि 2011 में ओमन चांडी के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के सत्ता में आने के बाद से राज्य में न तो निजीकरण की अनुमति दी गई और न ही नए खनन की, और यही नीति आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रस्तावित मिनरल कॉरिडोर पर अभी तक किसी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की सहमति नहीं दी है और प्रस्ताव के सभी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए समय चाहिए।
उन्होंने दोहराया, ‘‘मैं सभी को फिर आश्वस्त करना चाहता हूं कि न निजीकरण होगा और न नया खनन। यही हमारी स्पष्ट नीति है।’’
कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर में कटौती के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर अंतिम निर्णय लेने से पहले यूडीएफ के भीतर चर्चा की जाएगी।
भाषा शोभना गोला
गोला