नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में चल रहे किसी भी कम्प्यूटर की जासूसी करने के लिए 10 केंद्रीय एजेंसियों को अनुमति दे दी है। गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार देश की ये सुरक्षा एजेंसियां किसी भी व्यक्ति के कंप्यूटर में जेनरेट, ट्रांसमिट, रिसीव और स्टोर किए गए किसी दस्तावेज को देख सकती हैं। सरकार के इस आदेश से विपक्ष भड़क गया है।
गृह मंत्रालय के जारी आदेश के अनुसार इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स, डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआई, एनआईए, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट (रॉ), डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस और दिल्ली के कमिश्नर ऑफ पुलिस को देश में चलने वाले सभी कंप्यूटर की जासूसी की मंजूरी दी गई है।
उधर यह आदेश जारी होने के बाद विपक्ष सरकार पर भड़क गया है। कांग्रेस ने इस फैसले को लोगों की निजता पर हमला बताया। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने तंज करते हुए कहा कि, अबकी बार, निजता पर वार! जनता की जासूसी, मोदी सरकार की निन्दनीय प्रवृत्ति। वहीं माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि यह सरकार हर भारतीय को अपराधी क्यों मानती है? हर नागरिक की जासूसी का आदेश देना असंवैधानिक है। यह टेलीफोन टैपिंग गाइडलाइन्स, प्राइवेसी जजमेंट और आधार पर आए अदालती फैसले का भी उल्लंघन है।
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वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलीमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि केंद्र सरकार ने महज एक सामान्य से सरकारी आदेश के जरिए देश में सभी कंप्यूटर की जासूसी का आदेश दे दिया है। ओवैसी ने कहा कि क्या केंद्र सरकार इस फैसले से ‘घर-घर मोदी’ का अपना वादा निभा रही है। ओवैसी ने कहा कि 1984 में आपका स्वागत है।