डीजीपी बुजुर्ग व्यक्ति को बांग्लादेशी बताकर हिरासत में रखने के मामले की जांच कराएं: टीएमसी सांसद

डीजीपी बुजुर्ग व्यक्ति को बांग्लादेशी बताकर हिरासत में रखने के मामले की जांच कराएं: टीएमसी सांसद

डीजीपी बुजुर्ग व्यक्ति को बांग्लादेशी बताकर हिरासत में रखने के मामले की जांच कराएं: टीएमसी सांसद
Modified Date: September 2, 2026 / 06:41 pm IST
Published Date: September 2, 2026 6:41 pm IST

कोलकाता, दो सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य समीरुल इस्लाम ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्धनाथ गुप्ता से उत्तर दिनाजपुर जिले के 66 वर्षीय व्यक्ति को बांग्लादेशी बताकर ‘गैर-कानूनी’ रूप से ‘75 दिन से अधिक समय तक हिरासत में रखे जाने’ के आरोपों की जांच करने का आग्रह किया।

जिले के बाजारगांव दो पंचायत इलाके के बागरोल गांव के रहने वाले और मधुमेह रोगी और पेशे से दिहाड़ी मजदूर जलील अख्तर को कथित तौर पर 19 जून को डलखोला पुलिस की एक टीम ने बांग्लादेशी नागरिक होने के शक में पकड़ा था।

हालांकि, उनके परिवार वालों का दावा है कि उन्होंने उनकी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज जमा किए थे, जिनमें संदिग्ध के पिता के नाम पर 1967 का जमीन का कागज भी शामिल था।

प्रभावित परिवार के रिश्तेदार और पड़ोसी मतिउर रहमान ने आरोप लगाया, ‘‘पुलिस ने अख्तर को बंदूक के जोर पर पकड़ा और उन्हें अपना बचाव करने का कोई मौका नहीं दिया गया।’’

पुलिस ने बताया कि उन्हें विदेशी अधिनियम की धारा 14 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह धारा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर सजा से संबंधित है और पुलिस को वैध दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करने और रहने वाले विदेशी नागरिकों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देती है।

अख्तर के परिवार वालों का आरोप है कि उन्हें शुरू में उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया में निजामपुर में स्थित निरुद्ध केंद्र में हिरासत में रखा गया था और बाद में सिलीगुड़ी के पास फुलबाड़ी के एक ‘निरुद्ध केंद्र’ में भेज दिया गया, जहां से उन्हें बीएसएफ को सौंप दिया गया ताकि उन्हें ‘बांग्लादेश वापस भेजा जा सके’।

इस्लाम ने ‘एक्स’ पर लिखा कि परिवार का दावा है कि बीएसएफ ने उसके दस्तावेजों की जांच करने के बाद उसे सीमा पार नहीं भेजा, बल्कि उसे ‘निरुद्ध केंद्र’ में वापस भेज दिया।

पुलिस ने 22 जुलाई को अख्तर को इस्लामपुर की एक अदालत में पेश किया और उसे ‘अवैध बांग्लादेशी नागरिक’ बताया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

वहीं, अख्तर के परिवार का दावा है कि अख्तर का जन्म और पालन-पोषण भारत में ही हुआ है। परिवार के अनुसार, 2002 और 2026 की एसआईआर के बाद जारी मतदाता सूचियों में भी अख्तर का नाम दर्ज है।

तृणमूल सांसद ने मामले का हवाला देते हुए बंगाल के डीजीपी से अपील की कि अगर आरोपी भारतीय नागरिक पाया जाता है, तो उसकी सुरक्षा की जाए।

भाषा संतोष माधव

माधव


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