राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए : तृणमूल सांसद मोइत्रा

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए : तृणमूल सांसद मोइत्रा

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  • Publish Date - July 7, 2026 / 08:45 PM IST,
    Updated On - July 7, 2026 / 08:45 PM IST

नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की स्वतंत्र रूप से जांच कराने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।

उन्होंने छात्रों के विरोध प्रदर्शन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन का भी समर्थन किया।

दोनों सांसदों ने मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के प्रमुख पदों से कथित इस्तीफे बड़े विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के पूरे कामकाज की स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि इस ट्रस्ट को सामान्य निजी ट्रस्ट नहीं माना जा सकता, क्योंकि अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में इसकी घोषणा की थी और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे अधिसूचित किया था।

मोइत्रा ने कहा कि ट्रस्ट को जनता से दान भी मिलता है।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘यह निजी ट्रस्ट कैसे है? इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने की, इसे गृह मंत्रालय ने अधिसूचित किया और इसमें पैसा जनता का आ रहा है। फिर यह निजी ट्रस्ट कैसे है?’’

मोइत्रा ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के दायरे से बाहर रखने के कारण श्रद्धालुओं को उसके कामकाज से जुड़ी जानकारी नहीं मिल पा रही है।

उन्होंने दावा किया कि हालिया विवाद से पहले भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। उन्होंने अभियंता दीनानाथ वर्मा और पूर्व लेखा प्रबंधक महिपाल सिंह की शिकायतों का हवाला दिया।

मोइत्रा ने आरोप लगाया कि वर्मा ने निर्माण ठेकों में कथित कमीशनखोरी की शिकायत की थी, जबकि महिपाल सिंह ने वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था और दावा किया था कि दोनों को हटाए जाने से पहले मंदिर परिसर का सीसीटीवी फुटेज गायब हो गया था।

उन्होंने मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन ट्रस्ट ने स्वयं किया और वह उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट करता है, जो ट्रस्ट के न्यासी भी हैं।

मोइत्रा ने आरोप लगाया, ‘‘700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का मामला सामने आया है। वास्तविक राशि इससे कहीं अधिक भी हो सकती है।’’

तृणमूल सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि ‘‘यह सब आपकी निगरानी में हुआ। चंपत राय को 2021 से इसकी जानकारी थी।’’

उन्होंने बजरंग लाल बागड़ा की नियुक्ति पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (नाल्को) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) रहने के दौरान उन पर भी भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगे थे।

मोइत्रा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) पर श्रद्धालुओं की आस्था से विश्वासघात करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है।

कीर्ति आजाद ने भी स्वतंत्र जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि अब तक हुई गिरफ्तारियों से मामला समाप्त नहीं हो जाता।

उन्होंने कहा, ‘‘अभी तो भूसे के ढेर में केवल एक सुई मिली है। पूरे भूसे के ढेर की तलाशी अभी बाकी है।’’

आजाद ने आरोप लगाया कि देश और विदेश के श्रद्धालुओं से मिले दान का पारदर्शी तरीके से प्रबंधन नहीं किया गया। उन्होंने मंदिर परियोजना से जुड़े भूमि लेनदेन के पुराने आरोपों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ चोरी का मामला नहीं है। लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ है और उनका पैसा भी चोरी हुआ है।’’

आजाद ने दावा किया कि ट्रस्ट श्रद्धालुओं का विश्वास खो चुका है और ट्रस्ट के सभी सदस्यों को इस्तीफा दे देना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के दोनों सांसदों ने शिक्षा के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरते हुए लगातार हो रही परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं का आरोप लगाया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

आजाद ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें। हमारे छात्र सड़कों पर बैठे हैं। उनके पास जाइए, उनसे बात कीजिए।’’ उन्होंने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और छात्रों के अनिश्चितकालीन धरने का उल्लेख किया।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि परीक्षाओं के संचालन को लेकर सरकार का रवैया पूरे तंत्र की विफलता को दर्शाता है।

दोनों सांसदों ने पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में हाल में एक नाबालिग से कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर भी भाजपा की आलोचना की।

भाषा रवि कांत रवि कांत माधव

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