व्यापार समझौता पारस्परिकता के सिद्धांत के विपरीत; जयशंकर, गोयल ‘पिंग पोंग’ खेल रहे हैं: थरूर

व्यापार समझौता पारस्परिकता के सिद्धांत के विपरीत; जयशंकर, गोयल ‘पिंग पोंग’ खेल रहे हैं: थरूर

व्यापार समझौता पारस्परिकता के सिद्धांत के विपरीत; जयशंकर, गोयल ‘पिंग पोंग’ खेल रहे हैं: थरूर
Modified Date: February 10, 2026 / 05:54 pm IST
Published Date: February 10, 2026 5:54 pm IST

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पहले से तय खरीद समझौते की तरह अधिक प्रतीत होता है जो पारस्परिकता के हर सिद्धांत के विपरीत है।

उन्होंने इस मामले में केंद्रीय मंत्री एस. जयशंकर और पीयूष गोयल पर ‘‘पिंग पोंग’’ खेलने का आरोप लगाया।

लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा की शुरूआत करते हुए थरूर ने कहा कि सरकार का यह दावा कि भारत ने चीन, वियतनाम या अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ‘‘बेहतर सौदा’’ हासिल किया है, सही प्रतीत नहीं होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि भारत ने एक या दो प्रतिशत की शुल्क कटौती हासिल कर ली होगी, लेकिन किसी भी पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्था ने गारंटीकृत खरीद प्रतिबद्धताओं के माध्यम से अमेरिका के साथ अपने व्यापार ‘सरप्लस’ को जानबूझकर कम करने पर सहमति नहीं जताई है।’’

थरूर ने कहा, ‘‘…जब वाणिज्य और उद्योग मंत्री तथा विदेश मंत्री, दोनों से इन प्रतिबद्धताओं के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इनके पैमाने, समयसीमा या वित्तीय प्रभावों के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।’’

उन्होंने जयशंकर और गोयल पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘‘दोनों मंत्री कहते हैं कि सवालों के जवाब देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बेहद निराशाजनक है, क्योंकि जब कोई मंत्री इस तरह की जिम्मेदारी नहीं लेता है, तो जवाबदेही गायब हो जाती है और संसद को एक ऐसे बजट का सामना करना पड़ता है जो उन दायित्वों को छुपाता है जिन्हें सरकार खुले तौर पर स्वीकार करने का साहस नहीं दिखा रही है।’’

कांग्रेस सांसद ने सवाल किया कि एक तरफ 18 प्रतिशत और दूसरी तरफ शून्य प्रतिशत के ‘‘पारस्परिक टैरिफ’’ की बात कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह पहले से तय खरीद समझौते की तरह अधिक प्रतीत होता है जो पारस्परिकता के हर सिद्धांत को उलट देता है।’’

थरूर ने कहा कि ऐसे समय में जब भारत का अमेरिका के साथ कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 130 अरब अमेरिकी डॉलर है और व्यापार अधिशेष (सरप्लस) लगभग 45 अरब अमेरिकी डॉलर है, सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से अगले पांच वर्षों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का अमेरिकी सामान खरीदने का वादा किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने शुल्क को लगभग शून्य स्तर तक कम करने, कृषि क्षेत्र को खोलने, डेटा के स्थानीयकरण को शिथिल करने, बौद्धिक संपदा सुरक्षा उपायों को नरम करने और यहां तक ​​कि विशेष रूप से रूस से रणनीतिक ऊर्जा आयात में बदलाव लाने के लिए खरीद लक्ष्यों को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है।’’

उन्होंने कहा कि संसद को यह नहीं बताया गया है कि किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा कैसे की जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का यह दावा कि भारत ने चीन, वियतनाम या अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ‘बेहतर सौदा’ हासिल किया है, जांच में खरा नहीं उतरता।’’

भाषा सुभाष हक

हक


लेखक के बारे में