कोलकाता, 18 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस में जारी संकट को ‘‘अहंकार’’ और ‘‘भगवान राम के शाप’’ का परिणाम बताते हुए शुक्रवार को कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक लगाने के निर्वाचन आयोग के निर्णय में भाजपा की कोई भूमिका नहीं है।
निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले, तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी वाले गुट को ‘ममता आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम मिला, जबकि अरूप रॉय के नेतृत्व वाले विरोधी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया।
शुभेंदु ने कहा, ‘‘आयोग ने फ़ैसला नियमों के अनुसार और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद लिया। वह (ममता बनर्जी) अपनी पार्टी को एकजुट नहीं रख सकीं। पार्टी दो, तीन या चार गुटों में बंट गई है। इसके लिए वह खुद ज़िम्मेदार हैं। इसमें भाजपा की कोई सीधी भूमिका नहीं है।’’
उन्होंने एक संस्कृत श्लोक का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘जिस किसी में भी अहंकार है, सर्वशक्तिमान उस अहंकार को नष्ट कर देंगे।’’
मुख्यमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के लिए उसके पुराने बयानों एवं राजनीतिक रुख को भी ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि पार्टी ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
शुभेंदु ने कहा, ‘‘हिंदू धर्म को गंदा धर्म कहना, महाकुंभ को ‘मौत का कुंभ’ बताना और राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन यह कहते हुए जुलूस निकालना कि ‘हम राम मंदिर को स्वीकार नहीं करते’… भगवान राम के शाप से सबकुछ बर्बाद हो गया है।’’
वह राज्य सचिवालय में विश्वकर्मा पूजा कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बात कर रहे थे।
निर्वाचन आयोग का अंतरिम आदेश तब आया जब चुनाव निकाय ने पार्टी का नाम और उसका चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने के अधिकार को लेकर जारी विवाद में दोनों पक्षों की बात सुनी।
इस बीच, माकपा ने शुक्रवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में वामपंथी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतें भाजपा के मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरेंगी।
पार्टी ने कहा कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस संगठनात्मक संकट का सामना कर रही है।
भाषा
नेत्रपाल नरेश
नरेश