नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भोपाल में अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली पूर्व मॉडल त्विषा शर्मा की मौत के मामले में दिल्ली स्थित एम्स के मेडिकल बोर्ड द्वारा सौंपी गई अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट का अध्ययन कर रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि 11 पन्नों की यह रिपोर्ट 10 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंपी गई। रिपोर्ट में कथित तौर पर फंदे के रूप में इस्तेमाल की गई धातु के छल्ले वाली जिम्नास्टिक बेल्ट पर त्वचा के ऊतक मिलने की पुष्टि हुई है और यह त्विषा के गर्दन पर मिले चोट के निशानों के ‘पैटर्न’ से मेल खाती हैं।
त्विषा ने पिछले साल दिसंबर में समर्थ सिंह से शादी की थी। वह 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं।
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई एम्स के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में त्विषा का दूसरा पोस्टमार्टम करने के लिए इस बोर्ड का गठन किया गया था।
उन्होंने बताया कि पहले पोस्टमार्टम में यह पुष्टि नहीं हो सकी थी कि फंदा लगाने में किस वस्तु का इस्तेमाल किया गया था, क्योंकि उस समय बेल्ट विशेषज्ञों के पास जांच के लिए उपलब्ध नहीं थी।
सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने बाद में बेल्ट जब्त की और उसे एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों के नेतृत्व वाले दूसरे मेडिकल बोर्ड के समक्ष जांच के लिए पेश किया।
प्राथमिकी के अनुसार, त्विषा के पति समर्थ उन्हें एम्स भोपाल ले गए थे। समर्थ ने दावा किया था कि त्विषा ने 12 मई को रात 10 बजकर 20 मिनट पर घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
हालांकि, एम्स भोपाल के एक चिकित्सक ने 13 मई को पुलिस को सूचित किया कि त्विषा को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। इसके बाद इस संबंध में ‘मेडिको-लीगल’ मामला दर्ज किया गया।
प्राथमिकी दर्ज कराते समय पुलिस को दिए बयान में त्विषा के परिवार ने कहा कि त्विषा ने रात नौ बजकर 41 मिनट पर अपनी मां से फोन पर बात की थी।
परिवार ने प्राथमिकी में आरोप लगाया कि फोन पर बातचीत के दौरान समर्थ के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी थी और इसके बाद अचानक फोन कट गया था।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि बार-बार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। बाद में त्विषा की सास और सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने फोन उठाया तथा त्विषा की भाभी से कहा कि ‘‘वह अब नहीं रही’’, जिसके बाद उन्होंने फोन काट दिया।
पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया था कि मौत ‘‘जीवित अवस्था में फंदा लगाए जाने’’ के कारण हुई। रिपोर्ट में शरीर पर ‘‘मृत्यु से पहले लगी कई चोटें’’ भी पाई गई थीं।
हालांकि, शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम में खामियों का आरोप लगाते हुए त्विषा के परिवार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का रुख किया। अदालत ने एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड से दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया और बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।
त्विषा के परिवार ने आरोप लगाया था कि उनके ससुराल वाले उन्हें प्रताड़ित करते थे और शादी के समय दिए गए दहेज से संतुष्ट नहीं थे।
परिवार ने मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के भी आरोप लगाए। उनका दावा है कि कथित प्रताड़ना के कारण 33 वर्षीय त्विषा को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा।
एम्स के मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को दूसरा पोस्टमार्टम किया था और जांच के तहत घटनास्थल का भी दौरा किया था।
रिपोर्ट के निष्कर्षों का खुलासा करने से इनकार करते हुए एम्स दिल्ली के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि बोर्ड ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन किया।
गुप्ता ने कहा, ‘‘मेडिकल बोर्ड ने मामले के सभी संभावित पहलुओं पर बेहद बारीकी से विचार-विमर्श किया। विस्तृत और वैज्ञानिक आधार वाली राय देने से पहले करीब एक महीने तक उपलब्ध सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं का अध्ययन किया गया। सत्य और न्याय के हित में सीबीआई तथा न्यायपालिका के लिए यह एकदम स्पष्ट राय है।’’
उन्होंने इस बारे में और जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि अदालत के निर्देशों के अनुपालन में रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंप दी गई है।
भाषा गोला दिलीप
दिलीप