गरीब देश: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं इन्हें कम लागत पर वित्तपोषण में कैसे सक्षम बनाती हैं?

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गरीब देश: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं इन्हें कम लागत पर वित्तपोषण में कैसे सक्षम बनाती हैं?

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  • Publish Date - July 12, 2026 / 05:46 PM IST,
    Updated On - July 12, 2026 / 05:46 PM IST

(तिदियानी सिदीबे (पेरपिग्नन वाया डोमिटिया विश्वविद्यालय) और एरिक पेजे ब्लांक (एव्री- पेरिस-सैकले विश्वविद्यालय) द्वारा

पेरपिग्नन (फ्रांस), 12 जुलाई (द कन्वरसेशन) सबसे गरीब देश जहां नाजुक आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, वहीं विश्व बैंक जैसे बहुपक्षीय विकास बैंक (एमडीबी) इन्हें ऐसे ऋण प्रदान करते हैं जिनकी शर्तें वाणिज्यिक बैंकों और वित्तीय बाजारों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली शर्तों की तुलना में अधिक अनुकूल होती हैं।

इन परिचालन में घाटे से बचने का उनका राज क्या है? इसका उत्तर उनके प्राथमिक ऋणदाता की स्थिति में निहित है।

निम्न-आय वाले देशों की विशेषता यह है कि इन्हें डॉलर, यूरो, पाउंड स्टर्लिंग या येन जैसी मुद्राओं में अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक बहुत सीमित पहुंच प्राप्त नहीं होती है। ये बाजार देशों को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से ऋण लेने की अनुमति देते हैं।

इन देशों द्वारा ऋण चुकाए जाने में असफल रहने का जोखिम (या संप्रभु ऋण चूक का जोखिम) विकसित या उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में संरचनात्मक रूप से अधिक होता है।

इसका परिणाम क्या होता है? वाणिज्यिक बैंकों और बाजारों जैसे निजी ऋणदाता इन्हें वित्तपोषण प्रदान करने से हतोत्साहित हो जाते हैं। इसके विपरीत, वे ऋणग्रस्त धनी देशों को आसानी से ऋण दे देते हैं, क्योंकि उन्हें यह विश्वास होता है कि चाहे वह सही हो या गलत, उन्हें उनका पैसा वापस मिल जाएगा।

इस संदर्भ में, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं, विशेष रूप से बहुपक्षीय विकास बैंक—जैसे विश्व बैंक, अफ्रीकी विकास बैंक, एशियाई विकास बैंक आदि-गरीब देशों के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्हें हालांकि बहुत कम नुकसान उठाना पड़ता है और उनकी ऋण गुणवत्ता, जिसे ‘क्रेडिट रेटिंग’ के आधार पर मापा जाता है, सामान्यतः बहुत अधिक होती है।

डॉलर या यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं में गरीब देशों के वित्तपोषण का प्रश्न विशेष रूप से तब बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच काफी हद तक संप्रभु रेटिंग पर निर्भर करती है।

प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों—स्टैंडर्ड एंड पुअर्स, मूडीज और फिच से निवेश-श्रेणी रेटिंग प्राप्त करना, टिकाऊ शर्तों पर वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए एक प्रमुख आवश्यकता है।

स्टैंडर्ड एंड पुअर्स, मूडीज और फिच वैश्विक स्तर पर देशों, कंपनियों और वित्तीय संस्थाओं की वित्तीय स्थिरता और ऋण चुकाने की क्षमता (साख) का आकलन करती हैं।

ज्यादातर गरीब देश हालांकि इन मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। उनमें से कई देशों के लिए बहुपक्षीय विकास बैंक ही वित्तपोषण का प्रमुख स्रोत हैं।

निश्चित रूप से, महाद्वीप की आर्थिक और संस्थागत वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए एक प्रमुख अफ्रीकी रेटिंग एजेंसी विकसित करने की पहल सामने आ रही हैं। आज तक, तीन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन देशों के संप्रभु जोखिम के वित्तीय बाजारों द्वारा किए जाने वाले आकलन में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।

वाणिज्यिक बैंकों और बॉण्ड निवेशकों के विपरीत, बहुपक्षीय विकास बैंक (एमडीबी) आधिकारिक ऋणदाता होते हैं। वे लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित के लक्ष्यों द्वारा निर्देशित होते हैं। उनकी पहचान कई अन्य विशेषताओं से भी होती है:

1) उन्हें दीर्घकालिक विकास के वित्तपोषण का दायित्व सौंपा गया है।

2) उनके शेयरधारक सदस्य देश होते हैं, जिनमें से कुछ ऋण लेने वाले देश नहीं होते, बल्कि वे संस्था को समर्थन प्रदान करते हैं। यह अमेरिका का उदाहरण है, जो अफ्रीकी विकास बैंक, एशियाई विकास बैंक और अंतर-अमेरिकी विकास बैंक का प्रमुख शेयरधारक है; यह ऐसा देश है जो इन संस्थानों से ऋण नहीं लेता है।

3) उन्हें सामान्यतः उच्च रेटिंग के कारण अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक विशेषाधिकार प्राप्त पहुंच प्राप्त होती है—विश्व बैंक, अफ्रीकी विकास बैंक और एशियाई विकास बैंक को एएए रेटिंग प्राप्त है।

4) उन्हें प्राथमिकता प्राप्त लेनदार की स्थिति के कारण उत्पन्न होने वाले ऋण जोखिम से सुरक्षा प्राप्त होती है।

बहुपक्षीय विकास बैंकों के वित्तीय खातों से प्राप्त आंकड़े यह साबित करते हैं कि यह मॉडल मजबूत और भरोसेमंद है।

वर्ष 1992 से 2022 की अवधि में, किसी देश द्वारा बहुपक्षीय विकास बैंकों के प्रति अपने ऋण का भुगतान न करने (डिफॉल्ट) की वार्षिक संभावना 0.4 प्रतिशत रही। इसके विपरीत, अन्य सार्वजनिक और निजी ऋणदाताओं के मामले में यह संभावना 6 प्रतिशत से 12 प्रतिशत के बीच रही। यह जानकारी बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा संकलित आंकड़ों पर आधारित है।

बहुपक्षीय विकास बैंकों का व्यावसायिक मॉडल विशिष्ट होता है। अनुकूल शर्तों पर ऋण प्रदान करने के लिए उन्हें स्वयं अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड (ऋण-पत्र) बाज़ारों से कम लागत पर धन जुटाना पड़ता है।

इसके लिए उच्च क्रेडिट रेटिंग बनाए रखना आवश्यक होता है। यह, उनके प्राथमिकता प्राप्त ऋणदाता के दर्जे के अतिरिक्त, निम्नलिखित कारकों के कारण संभव हो पाता है:

1) पर्याप्त पूंजीगत अंशदान अर्थात् शेयरधारकों द्वारा उपलब्ध कराए गए वित्तीय संसाधन।

2) सदस्य देशों का पूरा समर्थन बैंक के लिए एक वित्तीय सुरक्षा कवच की तरह होता है।

3) ऋण (क्रेडिट) और वित्तीय जोखिमों का सावधानीपूर्वक एवं विवेकपूर्ण प्रबंधन।

वाणिज्यिक बैंक और बॉण्ड निवेशक अपनी ओर से, गरीब देशों के संप्रभु ऋण वित्तपोषण में सीमित भूमिका निभाते हैं।

इन्हें प्राथमिकता प्राप्त ऋणदाता का दर्जा या सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त नहीं होता है। यदि ऋण लेने वाला देश वित्तीय कठिनाइयों का सामना करता है, तो वे ऋण चूक के जोखिम के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए वे गरीब देशों को बहुत कम वित्तपोषण उपलब्ध कराते हैं और उच्च ब्याज दरों की मांग करते हैं।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल