चेन्नई, सात जुलाई (भाषा) पूर्व राज्य मंत्री के. सी. वीरमणि और अरकोट से विधायक एस. एम. सुकुमार मंगलवार को यहां अन्नाद्रमुक प्रमुख ए. के. पलानीसामी की अध्यक्षता में हुई पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे पार्टी में एक नए संकट की अटकलें तेज हो गई हैं, जो पहले से ही बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने का सामना कर रही है।
दोनों नेताओं की इस अनुपस्थिति को पार्टी के भीतर संभावित असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य के पूर्व मंत्री डॉ. सी. विजयभास्कर और एम. आर. विजयभास्कर समेत मरगथम कुमारवेल, एस. जयकुमार, पी. सत्यभामा और एसाक्की सुबाया जैसे अन्य सदस्य पहले ही विधायक पद से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो चुके हैं।
जोलारपेट विधानसभा क्षेत्र से विधायक वीरमणि और सुकुमार उन 25 बागी विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवहेलना करते हुए 13 मई को विधानसभा में हुए शक्ति परीक्षण के दौरान टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया था।
इसके बाद वीरमणि और सुकुमार समेत कुछ अन्य नेताओं को जिला सचिव के पद से हटा दिया गया था। बाद में सी. वे. षणमुगम को छोड़कर सभी बागी विधायकों ने पलानीस्वामी से सुलह कर उनके नेतृत्व में काम करने पर सहमति जताई, जिसके बाद इन नेताओं को पार्टी में अपेक्षाकृत कम महत्व वाले पद सौंप दिए गए।
रानीपेट और तिरुपत्तूर जिलों के पदाधिकारियों की इस परामर्श बैठक में पलानीस्वामी ने कथित तौर पर कहा कि मौजूदा टीवीके सरकार के अपना कार्यकाल पूरा करने की संभावना कम है।
उन्होंने पार्टी सदस्यों से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए कमर कसने और जीत के लिए प्रयास करने का आह्वान किया। एक वरिष्ठ नेता ने उनके हवाले से कहा कि राज्य में पार्टी की सत्ता में वापसी के लिए स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार जीत बेहद महत्वपूर्ण है।
पलानीसामी द्वारा जिला पदाधिकारियों के साथ की जा रही परामर्श बैठकों की जारी श्रृंखला के तहत आज यह बैठक हुई, जिसका उद्देश्य हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों की समीक्षा करना और भविष्य के चुनावों के लिए रणनीति तैयार करना है।
भाषा सुमित पवनेश
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