चेन्नई, 29 जनवरी (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 को देरी से लागू किया है, लेकिन यह ‘‘गहरे तक जड़ें जमाए भेदभाव की भावना और संस्थागत उदासीनता’’ से ग्रस्त उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन विनियमों को मजबूत किया जाना चाहिए और साथ ही इनमें मौजूद संरचनात्मक कमियों को दूर करने के लिए इनमें संशोधन भी किया जाना चाहिए तथा इन्हें वास्तविक जवाबदेही के साथ लागू किया जाना चाहिए।
देश में उच्च शिक्षा के नियामक निकाय ने 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिसने 2012 के भेदभाव-विरोधी रूपरेखा का स्थान लिया है।
नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव सहित अन्य भेदभावों से निपटने के लिए उन्हें लागू करने योग्य शासन व्यवस्था का रूप देते हैं।
नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव से संबंधित हैं, जिनमें जाति के आधार पर होने वाला भेदभाव भी शामिल है।
इस हालिया कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद से भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के बीच, छात्र आत्महत्याओं में स्पष्ट रूप से वृद्धि हुई है।
स्टालिन ने कहा, ‘‘इसके साथ ही दक्षिण भारत, कश्मीर और अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को निशाना बनाकर बार-बार हमले और उत्पीड़न की घटनाएं भी हुई हैं। इस संदर्भ में समानता के लिए सुरक्षा उपाय विकल्प का विषय नहीं बल्कि एक अपरिहार्य आवश्यकता हैं।’’
भाषा सुरभि संतोष
संतोष