नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली को जल्द ही दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के नए मुख्यालय में अपना पहला भूमिगत रसायन, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) कमांड सेंटर मिलने वाला है। यह अपनी तरह का पहला केंद्र है जिसका मकसद परमाणु आपात स्थिति, रासायनिक आपदा और बड़े पैमाने पर होने वाले संकटों के लिए राजधानी की तैयारी को काफी मजबूत करना है।
एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
परियोजना के लिए निविदा जारी की गई है जिसमें नए डीएफएस मुख्यालय के निर्माण और आपात स्थिति में कार्रवाई के लिए विशिष्ट अवसंरचना बनाने के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं।
प्रस्तावित मुख्यालय में एक ‘प्लग-एंड-प्ले’ भूमिगत सीबीआरएन कमांड सेंटर होगा, जिसे परमाणु युद्ध, रेडियोलॉजिकल रिसाव या रासायनिक आपदाओं के दौरान भी चालू रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिषेक मलिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस केंद्र को खास तौर पर इस तरह से विकसित किया जाएगा कि यह कर्मचारियों को परमाणु विकिरण से बचा सके और आपात स्थिति के दौरान कई एजेंसियों के बीच निर्बाध तालमेल सुनिश्चित कर सके।
मलिक ने कहा, ‘यह राष्ट्रीय राजधानी में अपनी तरह का पहला सीबीआरएन कमांड सेंटर होगा। इसे इस तरह से डिज़ाइन किया जा रहा है कि अंदर मौजूद कर्मचारियों पर विकिरण का असर न हो, जिससे मुश्किल हालात में प्रभावी कमांड और तालमेल बनाए रखा जा सके।’
उन्होंने कहा कि किसी आपदा के दौरान, कमांड सेंटर शहर के तीन मौजूदा आपदा निरोधक केंद्रों – नेहरू प्लेस, लक्ष्मी नगर और रोहिणी में अभियान का समन्वय करेगा और साथ ही डीएफएस की तलाशी और बचाव बटालियन का मार्गदर्शन भी करेगा।
यह केंद्र मौजूदा डीएफएस मुख्यालय की जगह पर बनाया जाएगा और इसके पांच साल के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
भाषा वैभव नरेश
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