दुनियाभर में कैंसर की आनुवंशिक जांच तक पहुंच असमान: द लैंसेट आयोग

दुनियाभर में कैंसर की आनुवंशिक जांच तक पहुंच असमान: द लैंसेट आयोग

दुनियाभर में कैंसर की आनुवंशिक जांच तक पहुंच असमान: द लैंसेट आयोग
Modified Date: September 25, 2026 / 12:45 pm IST
Published Date: September 25, 2026 12:45 pm IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) जीनोमिक जांच और उसके अनुरूप उपचार तक पहुंच में देशों के भीतर और देशों के बीच अब भी बहुत अधिक असमानता है। ‘द लैंसेट ऑन्कोलॉजी’ की ओर से एक गठित एक विशेषज्ञ आयोग ने इसकी जानकारी दी है।

विशेषज्ञ आयोग ने कैंसर से जुड़ी आनुवंशिक जांच से संबंधित शोध में भी व्यापक असमानताओं की पहचान की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बायोमार्कर आधारित कैंसर परीक्षणों में से केवल दो प्रतिशत परीक्षण निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में किए जाते हैं, जबकि लगभग 81 प्रतिशत परीक्षण उच्च आय वाले देशों में होते हैं।

आयोग के अंतरराष्ट्रीय लेखकों की टीम ने ‘‘सफलता के विरोधाभास’’ को लेकर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, सटीक चिकित्सा (प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी) के तेजी से विस्तार ने आबादी के स्तर पर मिलने वाले लाभों की तुलना में लागत और जटिलता को अधिक तेजी से बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि कैंसर की दवाओं पर वैश्विक खर्च पिछले पांच वर्षों में लगभग 75 प्रतिशत बढ़कर 2024 में करीब 252 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और इसके 2029 तक बढ़कर 441 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

शोधकर्ताओं ने क्लिनिकल परीक्षणों और जीनोमिक डेटासेट से जुड़े वैश्विक आंकड़ों का विश्लेषण किया तथा राष्ट्रीय कैंसर कार्यक्रमों का सर्वेक्षण किया।

टीम ने अनुमान लगाया कि दुनियाभर में कैंसर से पीड़ित 70 से 80 लाख लोगों को हर साल मानक उपचार के तहत आणविक जांच (मॉलिक्यूलर टेस्टिंग) की आवश्यकता होती है।

हालांकि, आयोग ने कहा कि विशेष रूप से निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में इसकी उपलब्धता अब भी सार्वभौमिक नहीं है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि उदाहरण के लिए, हर साल अनुमानित 3.14 लाख महिलाएं जिनको अंडाशय का कैंसर है, उन्हें बीआरसीए (स्तन कैंसर जीन) जांच कराना चाहिये, लेकिन इनमें से करीब आधी महिलाओं की यह जांच नहीं हो पाती। यह कमी मुख्य रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जांच की कम उपलब्धता के कारण है।

स्वास्थ्य प्रणालियों को इस दिशा में मदद करने के लिए आयोग ने यह तय करने की रूपरेखा पेश की है कि किन आणविक जांचों और उनसे जुड़े उपचारों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। इसके साथ ही उसने स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारी का आकलन करने के लिए एक उपकरण भी सुझाया है।

आयोग ने स्वास्थ्य कर्मियों की दक्षताओं से जुड़ी रूपरेखा और जिम्मेदार तरीके से आंकड़े साझा करने के सिद्धांत भी तय किए हैं।

भाषा रंजन संतोष

संतोष


लेखक के बारे में