कोच्चि, 20 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने पेरियार नदी की सफाई की निगरानी के लिए एक एकीकृत प्राधिकरण बनाने की ज़रूरत पर जोर दिया है।
अदालत ने कहा कि लाखों लोगों की ज़िंदगी दांव पर लगी है और राज्य सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए तथा अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की पीठ ने कहा कि सरकार ने पहले सितंबर 2025 में एक ‘एकीकृत नदी बेसिन संरक्षण और प्रबंधन योजना’ बनाने का सुझाव दिया था।
पीठ ने कहा, ‘‘लाखों लोगों की ज़िंदगी दांव पर है और हमें तबाही का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि सभी संबंधित पक्ष ज़िम्मेदारी से काम करेंगे और अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे, ताकि पेरियार नदी को बचाने के लिए सभी जरूरी रोकथाम और सुधारात्मक उपाय किए जा सकें।’’
यह टिप्पणी पेरियार नदी में उद्योगों और अलुवा बाजार से निकलने वाले कचरे को बहाने से रोककर प्रदूषण को कम करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई।
याचिकाकर्ता के.एस.आर. मेनन ने अदालत को बताया कि नदी की स्वच्छता की निगरानी के लिए एक एकीकृत प्राधिकरण की तत्काल आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान में ऐसी कोई संस्था मौजूद नहीं है।
पीठ ने केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) लगाने के लिए नयी समय-सीमा देने और उसका सख्ती से पालन करने का निर्देश भी दिया, क्योंकि इस तरह का तंत्र उस जल-स्रोत से जुड़ी जैव-विविधता और पेड़-पौधों एवं जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए ‘ज़रूरी’ है।
बोर्ड द्वारा अदालत को यह बताए जाने के बाद यह निर्देश जारी किया गया कि राज्य विधानसभा चुनावों के कारण पहले दी गई समय-सीमा का पालन नहीं किया जा सका था।
भाषा सुरेश माधव
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