उप्रः अदालत ने निजी प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच का निर्देश दिया

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उप्रः अदालत ने निजी प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच का निर्देश दिया

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  • Publish Date - May 6, 2026 / 09:02 PM IST,
    Updated On - May 6, 2026 / 09:02 PM IST

प्रयागराज, छह मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में कार्यरत होने के बावजूद निजी प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल की स्थिति फंड और सुविधाओं की कमी के कारण नहीं, बल्कि इसके चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस की वजह से खराब हुई है।

अदालत ने मुख्य सचिव को सभी दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि एसआरएन अस्पताल की स्थिति फंड या सुविधाओं की कमी से नहीं बल्कि इसके चिकित्सकों की वजह से खराब हुई है, जो सरकार के उद्देश्य को विफल कर रहे हैं।”

अदालत ने कहा, “प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर एवं प्रवक्ता निजी नर्सिंग होम में सेवाएं दे रहे हैं और प्रयागराज में एक समानांतर चिकित्सा उद्योग चला रहे हैं। ये चिकित्सक सर्जरी कर रहे हैं और मरीजों को एसआरएन अस्पताल से निजी अस्पताल में भर्ती करवा रहे हैं।”

अदालत ने मामले की सुनवाई 26 मई को तय करते हुए निर्देश दिया कि अगली तिथि तक मुख्य सचिव अदालत को उच्च स्तरीय समिति के गठन के लिए की गई कार्रवाई से भी अवगत कराएंगे।

अदालत ने मुख्य सचिव को एसआरएन अस्पताल में पिछले 20 वर्षों से जारी उन निर्माण गतिविधियों की प्रगति पर नजर रखने का भी निर्देश दिया, जो राज्य सरकार द्वारा धन जारी किए जाने के बावजूद अभी तक पूरी नहीं हुई हैं।

अदालत ने चार मई को दिए आदेश में राज्य सरकार के वकील को मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के पक्ष में भूमि हस्तांतरण के संबंध में कैबिनेट की बैठक की प्रगति के बारे में अवगत कराने का निर्देश दिया।

राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के पक्ष में 31,314 वर्ग मीटर भूमि हस्तांतरण के लिए सभी संबंधित विभागों से अनापत्ति ले ली गई है और इस मामले को जल्द ही मंत्रिपरिषद के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलते ही भूमि का हस्तांतरण कर दिया जाएगा।

अदालत ने एसआरएन अस्पताल के ह्रदय रोग विभाग की दो मंजिला इमारत का निर्माण नहीं करने के लिए सरकार की खिंचाई की।

इस इमारत का निर्माण कार्य 2006 में शुरू हुआ था।

अदालत को बताया गया कि मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार सिंह और उनकी पत्नी एलाक्षी शुक्ला के खिलाफ 29 अप्रैल, 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

एलाक्षी शुक्ला ‘एक्यूरा हॉस्पिटल’ नाम के एक निजी अस्पताल की निदेशक हैं, जहां संबंधित चिकित्सक सर्जरी करने जाते हैं।

अदालत ने उक्त प्राथमिकी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “मौजूदा जनहित याचिका पर सुनवाई इस आरोप पर शुरू की गई कि डॉ. अरविंद गुप्ता नाम के एक चिकित्सक ने ‘फिनिक्स’ नाम के एक निजी अस्पताल में अपने मरीज का इलाज किया, जबकि डॉ. गुप्ता मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज में प्रोफेसर हैं।”

अदालत ने कहा, “उक्त प्राथमिकी से पता चलता है कि डॉ. संतोष कुमार सिंह जोकि मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज में एक सहायक प्रोफेसर हैं, एक निजी नर्सिंग होम चला रहे हैं, जिसमें उनकी पत्नी निदेशक हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है।”

भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र

जितेंद्र