उप्र: पूर्व कनिष्ठ अभियंता और उसकी पत्नी को 33 बच्चों के यौन शोषण के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई

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उप्र: पूर्व कनिष्ठ अभियंता और उसकी पत्नी को 33 बच्चों के यौन शोषण के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई

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  • Publish Date - February 20, 2026 / 07:58 PM IST,
    Updated On - February 20, 2026 / 07:58 PM IST

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को सिंचाई विभाग के एक पूर्व कनिष्ठ अभियंता (जेई) और उसकी पत्नी को एक दशक से अधिक समय तक 33 नाबालिग लड़कों (जिनमें से कुछ की उम्र महज तीन साल थी) के यौन शोषण के लिए मौत की सजा सुनाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम अदालत ने इन अपराधों को ‘दुर्लभतम’ मामला करार देते हुए राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को वर्ष 2010 से 2020 के बीच बच्चों का यौन शोषण करने और बाल यौन शोषण सामग्री तैयार करने का दोषी पाया।

अधिकारियों ने बताया कि भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोनों को दोषी ठहराते हुए अदालत ने उन्हें गंभीर प्रवेशन लैंगिक हमला, अश्लील उद्देश्यों के लिए बच्चों का इस्तेमाल, बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री का भंडारण, और उकसाने और आपराधिक साजिश सहित कई अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बयान में कहा कि अधीनस्थ अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को 33 पीड़ितों में से प्रत्येक को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।

जांच एजेंसी ने कहा, ‘‘अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी के घर से जब्त की गई नकदी को पीड़ितों के बीच बराबर अनुपात में वितरित किया जाए।’’

अदालत ने इन अपराधों को अभूतपूर्व क्रूरता और इनकी व्यवस्थित प्रकृति के आधार पर ‘दुर्लभतम अपराध’ करार दिया।

सीबीआई ने 31 अक्टूबर, 2020 को बच्चों के यौन शोषण, बच्चों का अश्लील सामग्री के लिए इस्तेमाल और बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण एवं इंटरनेट पर इसके प्रसार के आरोप में राम भवन और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप