राज्य सरकार ध्यानी को हिरासत में लेने का कानूनी आधार बताए: उत्तराखंड उच्च न्यायालय
राज्य सरकार ध्यानी को हिरासत में लेने का कानूनी आधार बताए: उत्तराखंड उच्च न्यायालय
नैनीताल, 20 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य सरकार को उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को हिरासत में लेने का कानूनी आधार स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की पीठ ने राज्य सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण तब मांगा जब सरकार ने अदालत को सूचित किया कि ध्यानी को रिहा कर दिया गया है।
पीठ ने इसके बाद राज्य से पूछा कि ध्यानी को हिरासत में लेने का कानूनी आधार क्या था। उसने सरकार को निर्देश दिया कि वह मंगलवार को अदालत के समक्ष अपना स्पष्टीकरण पेश करे।
इस संबंध में दायर याचिका के अनुसार, रामनगर पुलिस ने ध्यानी को रविवार शाम करीब पांच बजे ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर एक जनरल कोच से उस समय हिरासत में लिया जब वह सोनम वांगचुक के नेतृत्व वाली विरोध रैली में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली जा रहे थे।
दिल्ली रवाना होने से पहले, ध्यानी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जारी वांगचुक के आंदोलन के प्रति अपनी पार्टी का समर्थन जताते हुए फ़ेसबुक पर एक पोस्ट साझा किया था। पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक होने वाले ‘संसद चलो’ मार्च में हिस्सा लेगी। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की मांग भी की थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस ने ध्यानी के परिवार को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी, जिसके कारण उन्हें पूरी रात उनकी तलाश करनी पड़ी। पुलिस हिरासत में होने की बात पता चलने के बाद भी, परिवार के मुताबिक, पुलिस ने शुरू में उन्हें रिहा करने से इनकार कर दिया ।
पार्टी के महासचिव लालमणि ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की और वकील स्निग्धा तिवारी ने मामले में बहस की।
भाषा सं दीप्ति धीरज
धीरज

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