देहरादून, 22 सितंबर (भाषा) उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के जरिए प्रवेश के मामले में पुलिस ने एक अभ्यर्थी के पिता समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी रूपेश पंडित (30) और उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के लक्सर निवासी अरविंद कुमार के रूप में हुई है।
कुमार एक अभ्यर्थी के पिता हैं।
उन्होंने बताया कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा ‘अपनी सरकार’ पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने के संबंध में 13 सितंबर को देहरादून के रायपुर और क्लेमेंटाउन थानों में मुकदमे दर्ज किए गए थे।
अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान उपलब्ध कराए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए।
डोबाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलोनी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।
अधिकारी ने बताया कि एसआईटी ने मामले में कथित रूप से शामिल आरोपियों के दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच शुरू की।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सभी आरोपी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए, जिसके बाद टीम ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की और अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई।
डोबाल ने बताया कि जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए रायपुर थाने बुलाया, जहां बाद में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने बताया कि पंडित अपने साथियों के साथ पिछले पांच साल से ‘एजुकेशन कंसल्टेंसी’ का काम कर रहा था और मेरठ में ‘मिकोडो पाठशाला’ नाम से कंपनी चला रहा था।
अधिकारी ने बताया कि इस कंपनी के माध्यम से वह भारत के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम जैसे पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिले दिलाता था।
उन्होंने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि अरविंद कुमार ने अपनी बेटी परी और दो अन्य परिचितों के बच्चों के दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था।
डोबाल ने बताया कि प्रत्येक दाखिले के लिए 45 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था और इसके लिए 20-20 लाख रुपये अग्रिम भुगतान के रूप में लिए गए थे जबकि शेष राशि एमबीबीएस में दाखिला व कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद रूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराए।
भाषा दीप्ति जितेंद्र
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