भुवनेश्वर, 22 सितंबर (भाषा) ओडिशा के पंचायती राज मंत्री रबी नारायण नाइक ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार आगामी पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) को आरक्षण देने के मुद्दे की समीक्षा कर रही है।
आगामी पंचायत चुनावों में ओबीसी/एसईबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने को लेकर बीजू जनता दल (बीजद) के वरिष्ठ विधायक रणेन्द्र प्रताप स्वैन द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में नाइक ने कहा कि उच्चतम न्यायालय और ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेशों से इस श्रेणी के आरक्षण का दायरा प्रभावित हुआ है।
नाइक ने अपने लिखित जवाब में कहा, ‘‘के. कृष्णमूर्ति मामले में उच्चतम न्यायालय के ‘ट्रिपल टेस्ट’ के निर्देश और 2016 में ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर राज्य सरकार को 2021 में ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम-1964, ओडिशा पंचायत समिति अधिनियम-1959 और ओडिशा जिला परिषद अधिनियम-1991 में संशोधन करना पड़ा। इसके तहत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और ओबीसी के लिए कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय कर दी गई।’’
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप ओबीसी/एसईबीसी के लिए पूर्व में लागू 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान प्रभावित हुआ।
उच्चतम न्यायालय के ‘ट्रिपल टेस्ट’ के तहत राज्य सरकारों को स्थानीय निकायों के संदर्भ में पिछड़ेपन की प्रकृति और उसके प्रभावों की गहन और समकालीन व्यावहारिक जांच करने के लिए एक समर्पित आयोग का गठन करना अनिवार्य है।
इसके अलावा, राज्यों को आयोग की सिफारिशों के आधार पर आरक्षण का अनुपात निर्दिष्ट करना होता है और यह सुनिश्चित करना होता है कि कुल आरक्षण शीर्ष अदालत द्वारा तय की गई 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा से अधिक न हो।
नाइक ने कहा कि हालांकि 2021 में तीनों पंचायती राज कानूनों में संशोधन किया गया था, लेकिन राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के 2022 के चुनावों में ओबीसी/एसईबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान नहीं कर सकी थी।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के ‘ट्रिपल टेस्ट’ के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने का हवाला देते हुए इस मामले को ओडिशा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। इसके बाद राज्य सरकार को ओबीसी/एसईबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण वापस लेना पड़ा।
भाषा खारी अविनाश
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