शिमला, 10 जुलाई (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को एक पवित्र राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया और साहस, त्याग तथा आशा का संचार कर स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ियों को प्रेरित किया।
वह शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) द्वारा आयोजित वंदे मातरम् की यात्रा पर स्थायी प्रदर्शनी के उद्घाटन तथा ‘सरदार पटेल का विजन : अखंडता, एकजुटता और संघवाद’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर रहे थे।
उपराष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने केवल रियासतों और भूभागों का ही नहीं, बल्कि देशवासियों के दिलों का भी एकीकरण किया। उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक संविधान और एक साझा भविष्य’ की मजबूत नींव रखी।
यहां जारी एक बयान के अनुसार राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘वंदे मातरम् ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को एक पवित्र राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया और साहस, त्याग तथा आशा के साथ स्वतंत्रता सेनानियों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।’’
उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल भावनाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ईमानदारी, उत्कृष्ट कार्य और साझा उद्देश्य के प्रति समर्पण के रूप में हर दिन दिखाई देनी चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे वंदे मातरम् के अमर संदेश और सरदार पटेल के दूरदर्शी विचारों को आगे बढ़ाते हुए एकजुट, आत्मविश्वासी और समावेशी भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करें।
इससे पहले उपराष्ट्रपति का शिमला पहुंचकर सरदार पटेल के दृष्टिकोण पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन करने का कार्यक्रम था, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका दौरा रद्द कर दिया गया।
भाषा गोला रंजन
रंजन