कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई को आवाज का नमूना देने का निर्देश दिया

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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई को आवाज का नमूना देने का निर्देश दिया

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  • Publish Date - July 10, 2026 / 05:34 PM IST,
    Updated On - July 10, 2026 / 05:34 PM IST

कोलकाता, 10 जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर डराने-धमकाने वाले बयान देने के मामले में 15 जुलाई को न्यायिक मजिस्ट्रेट को अपनी आवाज का नमूना दें।

अदालत ने बनर्जी द्वारा अपनी आवाज का नमूना देने में देरी पर अप्रसन्नता व्यक्त किया।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि वह इस मामले में कार्यवाही रद्द करने और सांसद को कठोर कार्रवाई से संरक्षण देने वाले आदेश को वापस लेने संबंधी उनकी याचिका पर सुनवाई समय से पहले कर सकते हैं।

उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि क्षेत्राधिकार वाली अदालत या जांच एजेंसी के समक्ष बनर्जी के पेश होने के दौरान उन पर अंडे न फेंके जाएं, या किसी अन्य तरह से परेशान नहीं किया जाए।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि भाषण मामले की जांच के सिलसिले में मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आवाज का नमूना देने के बिधाननगर अदालत के आदेश के खिलाफ बनर्जी की समीक्षा याचिका को, सांसद के वकील के अनुरोध पर ‘‘वापस ले लिया गया मानते हुए खारिज’’ किया गया।

अदालत ने लोकसभा सदस्य को 15 जुलाई को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होकर अपनी आवाज का नमूना रिकॉर्ड कराने का निर्देश दिया।

उन्हें जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी द्वारा जारी नोटिस का पालन करने का निर्देश दिया गया, जैसा कि उच्च न्यायालय के 21 मई के उस आदेश में उल्लेख किया गया है जिसमें उन्हें कठोर कार्रवाई से राहत प्रदान की गई थी।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने बनर्जी को 31 जुलाई तक यह राहत दी है। अप्रैल में चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में सांसद की कथित टिप्पणियों को लेकर दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में यह राहत दी गई। तृणमूल सांसद ने प्राथमिकी को रद्द करने का भी अनुरोध किया है।

एक अन्य याचिका में, बनर्जी ने बिधाननगर सब-डिविजनल न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें जांच के सिलसिले में पुलिस के अनुरोध पर उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आवाज का नमूना देने को कहा गया था।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि बनर्जी को डराने-धमकाने वाले भाषण के मामले में जांच एजेंसी के नोटिस का पालन करने और जांच में सहयोग करने की शर्त पर कठोर कार्रवाई से संरक्षण दिया गया है।

इस बात को ध्यान में रखते हुए कि बनर्जी ने बिधाननगर अदालत के उस आदेश का पालन नहीं किया जिसमें उन्हें अपनी आवाज का नमूना देने के लिए कहा गया था, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने आदेश को चुनौती देने वाली सांसद की याचिका को खारिज करने और ‘‘भारी जुर्माना’’ लगाने की चेतावनी दी।

सांसद की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि बनर्जी स्वीकार करते हैं कि जिस भाषण पर सवाल उठाए गए हैं, उसमें उनकी ही आवाज थी।

हालांकि, उन्होंने दलील दी कि तृणमूल नेता को निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने का संवैधानिक अधिकार है।

बनर्जी के वकील ने कहा कि सांसद अपनी आवाज का नमूना शनिवार को देने के लिए तैयार हैं और उन्होंने अंडे फेंके जाने से सुरक्षा के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया।

उच्च न्यायालय ने जब कहा कि यह सुनिश्चित करना कानून प्रवर्तन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि अंडे न फेंके जाएं, तो अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि ऐसी कोई घटना नहीं होगी।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि 21 मई का आदेश पारित करने के बाद, आवाज का नमूना से संबंधित आदेश को चुनौती देने वाली संबंधित समीक्षा याचिका एक अलग पीठ के समक्ष दी गई।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘इससे याचिकाकर्ता का आचरण पता चलता है’’।

भाषा सुभाष माधव

माधव