वीबीएसए ‘वेरी बैड शिक्षा ऐक्ट’ है, विधेयक का खुलकर विरोध करे तेदेपा: कांग्रेस

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वीबीएसए ‘वेरी बैड शिक्षा ऐक्ट’ है, विधेयक का खुलकर विरोध करे तेदेपा: कांग्रेस

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  • Publish Date - July 10, 2026 / 01:49 PM IST,
    Updated On - July 10, 2026 / 01:49 PM IST

नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रस्तावित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक, 2025’ असल में ‘वेरी बैड शिक्षा ऐक्ट’ हैं क्योंकि यह संघीय ढांचे, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 की भावना के खिलाफ है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक खबर का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्यों ने वीबीएसए विधेयक के केंद्रीकरण वाले प्रावधानों का विरोध किया है।

रमेश का कहना था कि यदि राजग शासित राज्यों, खासकर आंध्र प्रदेश, को अपने रुख पर भरोसा है तो उन्हें 20 जुलाई से आरंभ हो रहे संसद के मानसून सत्र में इस विधेयक का विरोध करना चाहिए और असहमति नोट प्रस्तुत करना चाहिए।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर दावा किया कि यह विधेयक संविधान के संघीय ढांचे का अतिक्रमण करता है।

उनका कहना था, ‘‘इसे संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 66 के तहत लाया गया है, जबकि यह प्रावधान केवल उच्च शिक्षा संस्थानों में मानकों के समन्वय और निर्धारण तक सीमित है।’’

रमेश ने इसे ‘वेरी बैड शिक्षा ऐक्ट’ करार देते हुए आरोप लगाया कि विधेयक राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल देता है और विश्वविद्यालयों के गठन तथा विनियमन से जुड़े राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन करता है।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि विधेयक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की परिकल्पना के अनुरूप अनुदान देने वाली परिषद का प्रावधान नहीं है।

उनके अनुसार, इससे अनुदान देने की शक्तियां स्वायत्त शैक्षणिक निकायों के बजाय सीधे मंत्रालय के पास चली जाएंगी, जिससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी।

रमेश ने कहा, ‘‘प्रस्तावित कानून के दायरे में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इससे इन संस्थानों की अब तक की अकादमिक और संस्थागत स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।’’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधेयक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के लिए विश्वविद्यालयों से परामर्श की मौजूदा वैधानिक व्यवस्था को कमजोर किया गया है और नियामक संस्थाओं को व्यापक विवेकाधीन शक्तियां दी गई हैं।

रमेश ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू का उल्लेख करते हुए दावा किया कि यदि उन्हें लगता है कि वीबीएसए राज्यों के हित में नहीं है तो उन्हें इस मुद्दे पर खुलकर अपना रुख अपनाना चाहिए।

वीबीएसए विधेयक पर फिलहाल संसद की संयुक्त समिति विचार कर रही है।

भाषा हक हक नरेश

नरेश