नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने फ्रांस की स्वच्छ-प्रौद्योगिकी (क्लीन-टेक) कंपनी डाइऑक्सीकल के साथ भारत में कम-कार्बन रसायनों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी की है।
दोनों कंपनियों ने शुक्रवार को बताया कि इस पहल की शुरुआत संग्रहित कार्बन डाइऑक्साइड और नवीकरणीय बिजली की मदद से फॉर्मिक एसिड के उत्पादन के लिए एक संयंत्र स्थापित करने से होगी।
कंपनियों ने कहा कि यह परियोजना अदाणी समूह के एक परिसर में स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि कार्बन उत्सर्जन को संग्रहित कर नवीकरणीय ऊर्जा की मदद से औद्योगिक रसायनों में कैसे बदला जा सकता है। शुरुआती परियोजना के सफल होने के बाद दोनों साझेदार इस प्रौद्योगिकी का व्यावसायिक स्तर पर विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।
फॉर्मिक एसिड का उपयोग वस्त्र, कृषि और विनिर्माण सहित विभिन्न उद्योगों में किया जाता है।
इस साझेदारी के साथ अदाणी समूह ने अपने नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचा कारोबार से आगे बढ़ते हुए कम-कार्बन रसायनों के क्षेत्र में प्रवेश किया है।
बयान के अनुसार, दोनों कंपनियां ऊर्जा, सामग्री, पैकेजिंग और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले अन्य औद्योगिक रसायनों के उत्पादन की संभावनाओं का भी पता लगाएंगी, जिनमें से कई अब भी जीवाश्म ईंधन आधारित कच्चे माल पर निर्भर हैं।
अदाणी समूह के निदेशक जीत अदाणी ने कहा, ‘‘ हमें नवीकरणीय बिजली और संग्रहित कार्बन से संचालित भारत की पहली फॉर्मिक एसिड उत्पादन इकाई की शुरुआत करते हुए गर्व हो रहा है। डाइऑक्सीकल के साथ यह साझेदारी इस बात का प्रमाण है कि रणनीतिक औद्योगिक सहयोग के जरिये कार्बन जैसी चुनौती को टिकाऊ और लागत प्रभावी आर्थिक परिसंपत्ति में बदला जा सकता है।’’
डाइऑक्सीकल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं सह-संस्थापक सारा लामैसों ने कहा कि उनकी कंपनी की प्रौद्योगिकी रसायनों के उत्पादन में जीवाश्म ईंधन के बजाय बिजली और संग्रहित कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करती है। इससे उत्सर्जन कम करने और पारंपरिक उत्पादन प्रक्रियाओं पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह साझेदारी दर्शाती है कि स्वच्छ प्रौद्योगिकी और औद्योगिक स्तर की क्षमता मिलकर आवश्यक रसायनों के उत्पादन के तरीके को कैसे बदल सकती है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा, विनिर्माण क्षमता और महत्वाकांक्षा का अनूठा संगम है। अदाणी के साथ मिलकर हमारा लक्ष्य कम-कार्बन रसायनों के उत्पादन का प्रतिस्पर्धी और विस्तार योग्य मॉडल तैयार करना है।’’
कंपनियों ने कहा कि यह सहयोग स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत और यूरोप के बीच बढ़ते सहयोग को भी दर्शाता है, क्योंकि विनिर्माता कम-कार्बन आपूर्ति श्रृंखलाओं की ओर बढ़ रहे हैं।
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निहारिका मनीषा
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