नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता (माइलेज) तीन से पांच प्रतिशत तक कम हो सकती है, लेकिन इसके बदले मिलने वाले ऊर्जा सुरक्षा, कम कार्बन उत्सर्जन और बेहतर इंजन प्रदर्शन जैसे लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
मंत्रालय के अनुसार, इसके अलावा ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, तेज दहन, बेहतर पिकअप आदि जैसे लाभ भी इसमें शामिल हैं।
एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम की आलोचनाओं का जवाब देने के लिए जारी प्रश्नोत्तर दस्तावेज में मंत्रालय ने कहा कि ई20, ई10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में ‘‘अधिक स्वच्छ, बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक दक्ष ईंधन है।’’ इसे वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण, वाहन विनिर्माताओं के साथ परामर्श और घरेलू एथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बाद ही लागू किया गया है।
मंत्रालय ने इस आशंका को खारिज किया कि यह कार्यक्रम जल्दबाजी में लागू किया गया। उसने कहा कि भारत की एथनॉल मिश्रण पहल की शुरुआत 2001 में प्रायोगिक परियोजनाओं से हुई थी और 2006 तक देश के कुछ हिस्सों में पांच प्रतिशत एथनॉल मिश्रण लागू कर दिया गया था।
मंत्रालय ने कहा कि 2014 तक एथनॉल मिश्रण लगभग 1.5 प्रतिशत पर ही था, लेकिन 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति लागू होने और गन्ने के अलावा अन्य कच्चे माल को भी इसमें शामिल किए जाने के बाद सरकार ने एथनॉल उत्पादन में तेजी लाई।
उसने कहा कि भारत ने निर्धारित समय से पहले 2022 में 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया और एथनॉल उत्पादन संयंत्रों, भंडारण तथा लॉजिस्टिक्स में निवेश के बाद 2025-26 एथनॉल आपूर्ति वर्ष में 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य भी प्राप्त कर लिया।
पुराने वाहनों को लेकर उठी चिंताओं पर मंत्रालय ने कहा कि ई20 को देशभर में लागू करने से पहले इंजन की टिकाऊ क्षमता, ईंधन प्रणाली, विभिन्न सामग्रियों के साथ अनुकूलता, जंग-रोधी क्षमता, वाहन संचालन और उत्सर्जन सहित अनेक पहलुओं पर व्यापक परीक्षण किए गए।
मंत्रालय ने कहा कि मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प सहित वाहन विनिर्माताओं से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार, वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग किए गए वाहनों में ई20 के कारण जंग लगने, असामान्य घिसाव या कलपुर्जों के जल्दी खराब होने की कोई शिकायत नहीं मिली है।
मंत्रालय ने पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 जैसे कई प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराने की मांग को भी खारिज करते हुए कहा कि पूरे देश में समानांतर आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी और एक लाख से अधिक खुदरा ईंधन केंद्रों पर वितरण व्यवस्था जटिल हो जाएगी।
कीमतों के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि ई20 जरूरी नहीं कि पारंपरिक पेट्रोल से सस्ता हो, क्योंकि किसानों को समर्थन देने के लिए एथनॉल की खरीद कीमत लाभकारी स्तर पर तय की जाती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने पर यह पेट्रोल से भी महंगा पड़ सकता है।
मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर कीमतें घटाना नहीं बल्कि आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना, कीमतों में स्थिरता लाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
मंत्रालय के अनुसार, 2014-15 के एथनॉल आपूर्ति वर्ष से अब तक एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता लगभग 316 लाख टन कम हुई है, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करीब 952 लाख टन घटा और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से ई20 को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारी से प्रभावित नहीं होने की अपील करते हुए कहा कि इसे देशभर में लागू करने से पहले वाहन निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों, तेल विपणन कंपनियों और नियामकों द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है।
भाषा निहारिका मनीषा
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