चेन्नई, 24 सितंबर (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने बृहस्पतिवार को दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को उनके पदों से हटाकर ‘अनिवार्य प्रतीक्षा सूची’ में डाल दिया। यह कार्रवाई ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरामणि के खिलाफ 2024 में दर्ज शिकायत के बावजूद कोई कदम न उठाने के आरोपों के बीच की गई है। वीरामणि अभी लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े एक पॉक्सो मामले में जेल में बंद हैं।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी ए. अरुण और एन. कन्नन पूर्ववर्ती द्रमुक सरकार के दौरान चेन्नई शहर में क्रमशः आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात थे। उसी दौरान, लगभग दो साल पहले, वीरामणि पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष रंजन कुमार के अनुसार, उन्होंने नवंबर 2024 में चेन्नई पुलिस को शिकायत देकर उद्योगपति और उनकी सहयोगी शांति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इसी पृष्ठभूमि में, सरकार के आदेश के अनुसार, तमिलनाडु पुलिस अकादमी में अतिरिक्त डीजीपी/निदेशक के तौर पर तैनात अरुण और कोयंबटूर शहर में आईजीपी/पुलिस आयुक्त के रूप में तैनात कन्नन को अनिवार्य प्रतीक्षा में भेज दिया गया है।
भाषा वैभव सुरेश
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