वरिष्ठ पत्रकार के. कुन्हीकनन का 74 वर्ष की आयु में निधन

वरिष्ठ पत्रकार के. कुन्हीकनन का 74 वर्ष की आयु में निधन

वरिष्ठ पत्रकार के. कुन्हीकनन का 74 वर्ष की आयु में निधन
Modified Date: September 10, 2026 / 09:35 am IST
Published Date: September 10, 2026 9:35 am IST

तिरुवनंतपुरम, 10 सितंबर (भाषा) वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार पत्र ‘जन्मभूमि’ के स्थानीय संपादक के. कुन्हीकनन का बृहस्पतिवार तड़के यहां निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

केरलम में भाजपा के मुखपत्र ‘जन्मभूमि’ से इसकी स्थापना के समय से ही जुड़े रहे कुन्हीकनन अपनी आधिकारिक सेवानिवृत्ति के बाद भी तिरुवनंतपुरम में स्थानीय संपादक के तौर पर कार्यरत थे।

पत्रकारिता में उनका लगभग पांच दशकों का अनुभव रहा।

सूत्रों ने बताया कि सोमवार शाम वह अपने आवास पर गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें यहां एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बृहस्पतिवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली।

कुन्हीकनन का जन्म कन्नूर जिले के इरिकुर स्थित कुट्टावू गांव में 1954 में हुआ था। तलिपरंबा में 1968 में आयोजित हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक शिविर में भाग लेने के बाद वह संघ के स्वयंसेवक बन गए। इस शिविर में एम. एस. गोलवलकर भी शामिल हुए थे।

दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने कासरगोड और कन्नूर तालुकों में भारतीय जनसंघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया।

बाद में उन्होंने युवा जनता और युवा मोर्चा में विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं। उन्होंने युवा मोर्चा के पहले महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष का पदभार भी संभाला।

उन्होंने पेरावूर और कन्नूर विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था।

कुन्हीकनन ने भाजपा प्रदेश समिति के सदस्य व मीडिया संयोजक, तथा ‘केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स’ के प्रदेश उपाध्यक्ष सहित कई अन्य पदों की जिम्मेदारी संभाली।

इसके अलावा उन्होंने फिल्म प्रमाणन बोर्ड, दूरसंचार सलाहकार बोर्ड और पत्रकार अधिमान्यता समिति के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

कुन्हीकनन ने के. जी. मारार की जीवनी, मारुपुरम, अटलजी एन्ना विस्मयम और केरल का राजनीतिक इतिहास समेत कई पुस्तकें भी लिखीं।

उन्हें बी. के. शेखर पुरस्कार, कान्हांगढ़ तपस्या पुरस्कार और गुरुजी सेवा समिति पुरस्कार के अलावा वरिष्ठ पत्रकारों के लिए केरलम विधानसभा के सम्मान से भी नवाजा गया था।

भाषा खारी वैभव

वैभव


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