कोलकाता, 12 जनवरी (भाषा) दिग्गज वामपंथी नेता समीर पुटातुंडू का लंबी बीमारी के बाद कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
पुटातुंडू 74 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी अनुराधा हैं।
वह काफी समय से अस्वस्थ थे और रविवार रात करीब 11:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। यह जानकारी मुकुंदपुर में स्थित निजी अस्पताल के एक अधिकारी ने दी, जहां वह भर्ती थे।
पश्चिम बंगाल में वाम आंदोलन के एक प्रमुख चेहरा रहे पुटातुंडू मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रभावशाली नेता थे। बाद में वैचारिक मतभेदों के चलते उन्होंने सैफुद्दीन चौधरी के साथ पार्टी छोड़ दी और ‘पार्टी ऑफ डेमोक्रेटिक सोशलिज्म’ (पीडीएस) की सह-स्थापना की, जिसे चुनावी राजनीति में खास सफलता नहीं मिली।
बीते वर्षों में उन्होंने कई राजनीतिक आंदोलनों में अहम भूमिका निभाई। इनमें ममता बनर्जी के नेतृत्व में सिंगूर और नंदीग्राम में हुआ भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन भी शामिल है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ऐसा लगता है जैसे मैंने किसी अपने को खो दिया हो। हम सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन में साथ थे। अनुराधा और अन्य लोगों को सांत्वना देने के लिए शब्द नहीं हैं, मैं हमेशा उनके साथ हूं।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि पुटातुंडू के साथ उनकी कई अच्छी यादें जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ एसईजेड और कॉरपोरेट कब्जे के खिलाफ संघर्षों में, सिंगूर-नंदीग्राम के दिनों से लेकर हाल के वर्षों में नागरिकता आंदोलन और किसान आंदोलन, तथा राज्य में भाजपा की फासीवादी साजिशों को नाकाम करने की लड़ाई में पुटातुंडू और पीडीएस के साथियों के साथ मेरी कई मधुर यादें हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कॉमरेड समीर पुटातुंडू को मेरी ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि और अनुराधा दी, परिवार के अन्य सदस्यों, मित्रों और साथियों के प्रति मेरी संवेदनाएं।’’
माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने पुटातुंडू को एक प्रतिबद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता बताया, जो जीवन भर जन आंदोलनों से जुड़े रहे।
भाषा जोहेब शोभना
शोभना