‘संसद चलो’ मार्च में शामिल होने के लिए वांगचुक ने अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति मांगी

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‘संसद चलो’ मार्च में शामिल होने के लिए वांगचुक ने अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति मांगी

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 01:15 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 01:15 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से अनुरोध किया कि उन्हें ‘‘कुछ समय के लिए ही सही’’ अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वह कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संसद मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने कहा कि वह ‘‘पूरी तरह स्वस्थ’’ महसूस कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य संबंधी सभी मानक सामान्य हैं।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को संबोधित अपने हस्तलिखित पत्र में वांगचुक ने कहा, ‘‘मैं यह बताना चाहता हूं कि आज मैं पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहा हूं और मेरे स्वास्थ्य संबंधी सभी मानक भी सामान्य हैं। इसलिए आपसे अनुरोध है कि कृपया मुझे अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति दें, भले ही कुछ समय के लिए ही, ताकि मैं आज संसद मार्च ‘संसद चलो’ में शामिल हो सकूं।’’

उन्होंने 20 जुलाई को लिखे पत्र में कहा, ‘‘इसके लिए मैं आपका अत्यंत आभारी रहूंगा।’’

वांगचुक की टीम ने उनके ‘एक्स’ खाते पर यह पत्र साझा करते हुए कहा कि वह संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल होने के लिए ‘‘पूरा प्रयास’’ कर रहे हैं।

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा कि उन्हें अपना ‘टैबलेट’ इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

‘एक्स’ पर साझा पोस्ट में कहा गया है, ‘‘सोनम वांगचुक आप सभी से मिलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अभी अस्पताल प्रशासन को एक पत्र सौंपा है। उनका स्वास्थ्य ठीक है और अस्पताल का भी कहना है कि उन्हें हिरासत में नहीं रखा गया है। फिर उन पर ये पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं?’’

इससे पहले लिखे एक अन्य पत्र में वांगचुक ने कहा था कि उनकी भूख हड़ताल प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च के बाद भी जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल में हुई विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करेगी या राजनीतिक दलों के नेता उन्हें यह भरोसा देंगे कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक हस्तलिखित संदेश में वांगचुक ने लिखा, ‘‘आपमें से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की विफलताओं, प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी 20 जुलाई तक स्वीकार करती है, तो मैं अपना अनशन समाप्त कर दूंगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि मेरी सेहत या अन्य कारणों से मैं संसद तक नहीं पहुंच पाता, तो विभिन्न दलों के सम्मानित सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे यही आश्वासन दें।’’

वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में ‘‘अवैध रूप से हिरासत’’ में रखा गया है।

उन्होंने लिखा, ‘‘मैं सफदरजंग अस्पताल में अवैध हिरासत में हूं, जहां मेरी आवाजाही, अभिव्यक्ति और हर तरह के संचार की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई है।’’

शनिवार को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा था कि यदि राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल आकर उन्हें यह भरोसा दें कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे, तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

आंग्मो ने ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल समर्थकों से वांगचुक की ओर से शांति बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने की अपील भी की थी कि आंदोलन का किसी तरह दुरुपयोग न हो।

वांगचुक ने कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके के आंदोलन का समर्थन करते हुए 28 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।

कॉजपा के प्रदर्शनकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, विशेषकर प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के बाद शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

लगातार 21 दिन तक अनशन करने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी।

उनके समर्थकों का आरोप है कि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

भाषा गोला सुरभि

सुरभि