नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) केंद्र और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को उकसाने को लेकर हिरासत में लिया गया था।
वांगचुक की हिरासत को उचित ठहराते हुए, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ को बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उनकी हिरासत का आदेश देते समय सभी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किया गया था।
मेहता ने पीठ को बताया, ‘‘यह अदालत एक ऐसे व्यक्ति के मामले की सुनवाई कर रही है जो पाकिस्तान और चीन से लगे सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को उकसा रहा है और जहां क्षेत्रीय संवेदनशीलता है।’’
मेहता ने दावा किया कि वांगचुक के साथ निष्पक्ष व्यवहार किया गया है और कहा कि रासुका के सभी प्रावधानों का पूरी तरह से पालन किया गया है।
मामले में दलीलें बुधवार को भी पेश की जाएंगी।
सोमवार को केंद्र ने कहा था कि वांगचुक ने नेपाल और बांग्लादेश की तरह विरोध प्रदर्शनों के लिए ‘जेन जेड’ को उकसाने की कोशिश की थी।
‘जेन जेड’ शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है कि जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है।
मेहता ने मंगलवार को दलील दी थी कि वांगचुक ने ‘अरब स्प्रिंग’ जैसे उन आंदोलनों का भी जिक्र किया था जिसके कारण अरब जगत के कई देशों में सरकारें गिर गई थीं।
शीर्ष अदालत जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उन्होंने रासुका के तहत उनकी हिरासत को चुनौती दी थी।
सोनम वांगचुक वर्तमान में जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
भाषा सुभाष संतोष
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