हमें अपने बेटे शुभेंदु पर गर्व, परिवार का हिस्सा बनने के लिए उन्हें सदस्यता लेने की जरूरत नहीं: संघ

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हमें अपने बेटे शुभेंदु पर गर्व, परिवार का हिस्सा बनने के लिए उन्हें सदस्यता लेने की जरूरत नहीं: संघ

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  • Publish Date - May 13, 2026 / 07:52 PM IST,
    Updated On - May 13, 2026 / 07:52 PM IST

(विजय जोशी)

नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि आरएसएस को अपने ‘‘पुत्र’’ शुभेंदु अधिकारी पर गर्व है और उन्हें परिवार का हिस्सा बनने के लिए सदस्यता फॉर्म पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता नहीं है, यह ठीक वैसे ही है जैसे कोई पुत्रवधू घर में शामिल हो जाती है। उन्होंने कहा कि संघ अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल होने और मुख्यमंत्री बनने वाले नेताओं को इसी नजरिए से देखता है।

होसबाले ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति स्कूल के दिनों में ही आरएसएस से जुड़ें। ऐसे कई लोग बाद में भी आरएसएस से जुड़ते हैं।’’

उनसे अधिकारी, सम्राट चौधरी और हिमंत विश्व शर्मा जैसे नेताओं के बारे में पूछा गया, जो अन्य पार्टियों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में आने के बावजूद मुख्यमंत्री बने।

जब उनसे पूछा गया कि क्या यह प्रवृत्ति आरएसएस को परेशान करती है या उसे इस बात से खुशी होती है कि अधिक लोग उसके साथ जुड़ रहे हैं, तो संघ के शीर्ष पदाधिकारी ने कहा, ‘‘हम खुश हैं। भाजपा का विस्तार हो रहा है। और इसका मतलब है कि इसे स्वीकार्यता मिल रही है।’’

उन्होंने कहा कि नए नेता भी धीरे-धीरे आरएसएस को समझने लगेंगे।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भाजपा में शामिल होने वाले नए सदस्यों को आरएसएस में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, तो होसबाले ने कहा कि वे पहले से ही लगभग आरएसएस में हैं, क्योंकि वे संघ के वैचारिक परिवार का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आरएसएस की कोई औपचारिक सदस्यता नहीं होती। मैंने भी औपचारिक सदस्यता नहीं ली है। आरएसएस एक परिवार जैसी संरचना है। इसीलिए जो भी इस परिवार में आता है, वह इसका हिस्सा बन जाता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘परिवार में आने वाली पुत्रवधू को कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होती; वह स्वाभाविक रूप से परिवार का हिस्सा बन जाती है।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या पश्चिम बंगाल के नये मुख्यमंत्री अधिकारी दामाद की तरह होंगे, तो होसबाले ने कहा, ‘‘हमें इस बेटे पर गर्व है।’’

पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत में आरएसएस और उसके स्वयंसेवकों की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘नागरिकों के रूप में, उन्होंने (स्वयंसेवकों ने) सब कुछ किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में हमारे स्वयंसेवकों को लंबे समय से उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है – पहले कम्युनिस्ट शासन के दौरान और फिर तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान।’’

होसबाले ने कहा, ‘‘सिर्फ इसलिए कि वे सनातन हिंदू की बात कर रहे थे, शाखाएं चला रहे थे, देशभक्त राष्ट्रवादी लोगों का निर्माण कर रहे थे, उन पर सरकार या सरकार समर्थित लोगों द्वारा हमला किया जा रहा था।’’

उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल स्वयंसेवकों का नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज का रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए बंगाल में हर हिंदू मतदाता एक हिंदू कार्यकर्ता बन गया। इसलिए यह एक सभ्यतागत प्रश्न था।’’

होसबाले ने कहा कि परिणाम सबके सामने हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक सुनामी की तरह था… क्योंकि जब आपको दीवार की ओर धकेल दिया जाता है, तो आप पलटकर वार करते हैं।’’

उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों ने अतीत में भी लोगों की सुरक्षा के लिए अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने खुद 2-3 स्थानों का दौरा किया है… हम कोई सेना नहीं हैं। हम यह समाज के प्रति अपने प्रेम और सामुदायिक सेवा की भावना से प्रेरित होकर करते हैं।’’

होसबाले ने कहा, ‘‘हमारे लोगों ने समान विचारधारा वाले उन लोगों को भी एकजुट किया है, जो कुछ करना चाहते हैं। हम जहां कहीं भी पीड़ित लोगों की मदद करने की कोशिश करते हैं, उनमें वे लोग भी शामिल होते हैं जो हमारे संगठन के सदस्य नहीं हैं, यहां तक ​​कि हिंदू भी नहीं हैं। कई बार ऐसा भी हो सकता है।’’

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश