रायपुर। छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ी चुनौती नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि कुपोषण है। युद्ध और महायुद्ध में जितने लोग नहीं मारे जाते उससे ज्यादा कुपोषित मां और कुपोषण के शिकार बच्चे मर जाते हैं। राज्य में कुपोषण के खिलाफ अभियान की शुरूआत करते ये बयान प्रदेश के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने दिया। उन्होंने कहा कि अगर ठान लें तो अगले तीन सालों में छत्तीसगढ़ में कुपोषण का स्तर भी देश के सबसे अच्छे राज्य केरल की बराबरी कर लेगा।
नक्सलियों पर जोरदार प्रहार, 4 इनामी सहित 6 नक्सली ढेर
छत्तीसगढ़ में कुपोषण कितनी बड़ी समस्या है, और इस समस्या के खिलाफ सरकार कितनी मजबूती से लड़ना चाहती है, ये बातें शुक्रवार को तब साफ हो गई जब कुपोषण के खिलाफ रमन सिंह ने मुख्यमंत्री सुपोषण योजना की शुरुआत की है। राजधानी के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव से लेकर अपर मुख्य सचिव, महिला बाल विकास विभाग की सचिव समेत सारे अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे, और उन्हीं की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई के आगे नक्सलियों की लड़ाई भी कहीं नहीं टिकती। सबसे बड़ी लड़ाई कुपोषण के खिलाफ ही है। उन्होंने आह्वान किया कि अगर सभी ठान लें तो अगले तीन सालों में कुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ भी देश के सबसे बेहतर राज्य केरल की बराबरी कर लेगा।
जीएसटी की दरों में राहत, रेस्टोरेंट में खाना अब सस्ता
पिछले 14 सालों में सरकार की कोशिशों से कुपोषण के मामलों में उल्लेखनीय कमी भी आई है। आंगनबाड़ी, फुलवारी, अमृत दूध और महतारी योजना के चलते कुपोषण का स्तर 70 प्रतिशत से घटकर राष्ट्रीय औसत के आसपास 30 तक आ पहुंचा है। लेकिन कुपोषण के खिलाफ राज्य सरकार की मददगार यूनीसेफ के अधिकारी कहते हैं, आगे की चुनौती ज्यादा कड़ी है। बहरहाल, मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन से कुपोषण के खिलाफ जंग को नई धार मिलेगी ऐसी उम्मीद तो की ही जा सकती है। खासकर, ऑनलाइन निगरानी और मोबाइल ऐप जैसी तकनीक से असरदार परिणाम दिला सकती है।
वेब डेस्क, IBC24