पश्चिम बंगाल का बजट : कल्याणकारी मॉडल कायम रखने के साथ विकास, रोजगार पर जोर

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पश्चिम बंगाल का बजट : कल्याणकारी मॉडल कायम रखने के साथ विकास, रोजगार पर जोर

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  • Publish Date - June 22, 2026 / 08:01 PM IST,
    Updated On - June 22, 2026 / 08:01 PM IST

कोलकाता, 22 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के छह सप्ताह बाद भाजपा सरकार ने सोमवार को अपना पहला बजट पेश किया। यह बजट सिर्फ सरकारी आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं था, बल्कि इसके जरिए सरकार ने एक व्यापक राजनीतिक संदेश देने का भी प्रयास किया।

सत्ता संभालने के 44 दिन बाद पेश इस बजट के जरिए सरकार ने राज्य के लिए नयी राजनीतिक और आर्थिक दिशा की रूपरेखा पेश करने की कोशिश की, जिसे लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सबसे कठिन वैचारिक चुनौती वाला क्षेत्र माना जाता रहा।

वर्ष 2026-27 के लिए 4.38 लाख करोड़ रुपये के बजट में बंगाल की व्यापक कल्याणकारी व्यवस्था को बरकरार रखने का प्रयास किया गया है। साथ ही, इसमें ऐसा कदम उठाने की कोशिश की गई है, जिसे राज्य में किसी सरकार ने वर्षों से गंभीरता से नहीं अपनाया था-यानी विकास, निवेश, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाना।

फरवरी में पेश तृणमूल कांग्रेस सरकार के अंतरिम बजट में नकद सहायता, सामाजिक कल्याण योजनाओं और लक्षित सब्सिडी पर आधारित कल्याणकारी मॉडल पर जोर था, वहीं भाजपा का पहला पूर्ण बजट उस ढांचे को समाप्त किए बिना उसे नए सिरे से आकार देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कल्याणकारी योजनाएं और सामाजिक क्षेत्र पर खर्च जारी रखा गया है, लेकिन अब जोर केवल लाभों के विस्तार पर नहीं, बल्कि कल्याण, रोजगार सृजन और आर्थिक पुनरुत्थान के संतुलित मेल पर है।

वर्ष 2026-27 के लिए कुल व्यय 4.38 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो फरवरी में टीएमसी सरकार द्वारा प्रस्तावित 4.06 लाख करोड़ रुपये के बजट से लगभग आठ प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि ऐसे समय में की गई है, जब भाजपा का कहना है कि उसे पिछली सरकार से 8.15 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बोझ विरासत में मिला है।

बजट अनुमान के अनुसार, 2026-27 में राजस्व घाटा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 1.02 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान 2.07 प्रतिशत से काफी कम है। वहीं, राजकोषीय घाटा 2.91 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 3.40 प्रतिशत से कम है। इसके अलावा, राज्य का कुल कर्ज भी मामूली रूप से घटकर जीएसडीपी के 37.98 प्रतिशत पर आने का अनुमान है, जबकि पहले यह 38.29 प्रतिशत था।

महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग बजट में सबसे अधिक धनराशि प्राप्त करने वाला क्षेत्र बनकर उभरा है। इसके लिए 52,308 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो फरवरी में आवंटित 42,113 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए 51,836 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि पहले यह राशि 46,293 करोड़ रुपये थी। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग का आवंटन बढ़ाकर 44,948 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पहले 41,234 करोड़ रुपये था।

भाजपा की अन्नपूर्णा योजना ने तृणमूल की लक्ष्मी भंडार योजना की जगह ले ली है। गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त सहायता, बढ़ी हुई पेंशन, भरोसा योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को सहायता और उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं के लिए प्रोत्साहन जैसी घोषणाएं यह संकेत देती हैं कि कल्याणकारी योजनाओं का सिलसिला जारी रहेगा।

साथ ही, कई वर्षों में पहली बार रोजगार सृजन को बजट में प्रमुख स्थान दिया गया है और इसे सरकार की प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा गया है।

एक लाख सरकारी नौकरियों की घोषणा—जिसमें 20,000 पुलिस कर्मियों, 50,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती तथा विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरना शामिल है—ने भर्ती प्रक्रिया को केवल रोजगार उपलब्ध कराने का उपाय ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश का माध्यम भी बना दिया है।

ये प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आए हैं, जब राज्य में स्कूल भर्ती घोटाले और भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद राजनीतिक मुद्दा हैं।

हालांकि, कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन घटाकर 8,565 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि टीएमसी सरकार के अंतिम बजट में इसके लिए 10,463 करोड़ रुपये का प्रावधान था। दूसरी ओर, सरकार ने उद्योग, बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़ी योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाया है।

तृणमूल सरकार के दौरान गृह एवं पर्वतीय मामलों के लिए बजटीय आवंटन 16,439 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 17,925 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे कानून-व्यवस्था, सीमा सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण पर सरकार के बढ़ते जोर का संकेत मिलता है।

इसके विपरीत, अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के बजट में उल्लेखनीय कटौती की गई है। इस मद के लिए आवंटन तृणमूल के अंतिम बजट में 5,713 करोड़ रुपये था, जिसे घटाकर 2,165 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के लिए बजटीय आवंटन 1,484 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3,267 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का बजट भी दोगुने से अधिक बढ़ाते हुए 217 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 506 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश