(तस्वीरों सहित)
कोलकाता, 25 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपना दूसरा ‘जनता दरबार’ सोमवार को आयोजित किया, जिसमें बड़ी तादाद में नौकरी के इच्छुक युवा, शिक्षक, पेशेवर और आम नागरिक अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखने पहुंचे।
शुभेंदु के आगमन से पहले ही सॉल्ट लेक स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय में सैकड़ों लोग जमा हो गए और इमारत के आसपास की तंग गलियां प्रतीक्षालय में तब्दील हो गईं।
नौकरी के इच्छुक युवाओं के हाथों में फाइल तो बुजुर्ग नागरिकों के हाथों में कागजों के बंडल थे। शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि, नर्सें, पुलिस में नौकरी की इच्छुक महिलाएं और अन्य लोग भी मौजूद थे, जो इस उम्मीद के साथ आए थे कि वर्षों से अनसुनी उनकी फरियाद शायद अब सुनी जाए।
सुबह से ही पार्टी कार्यालय के बाहर लंबी कतारें लग गईं। लोग अर्जियां और ज्ञापन लेकर इंतजार करते रहे। शुभेंदु ने नौ मई को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद ‘जन-संपर्क’ के तहत यह पहल शुरू की थी और 18 मई को पहला ‘जनता दरबार’ आयोजित किया था।
शुभेंदु जब सुबह 10 बजे के आसपास भाजपा कार्यालय पहुंचे, तो वहां ‘जय श्री राम’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ जैसे नारे लगाए गए। कई लोग दूर-दराज के जिलों से सीधे मुख्यमंत्री से मिलने की उम्मीद लेकर आए थे।
इस जमावड़े में पश्चिम बंगाल की सामाजिक विविधता साफ दिखी, जहां शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि, ‘ग्रुप डी’ के अभ्यर्थी, चिकित्सा पेशेवर, अंशकालिक शिक्षक, कथित चुनावी हिंसा के पीड़ित और जन व व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान की गुहार लेकर लोग पहुंचे थे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कार्यालय के अंदर करीब 100 व्यक्तियों और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि नौकरी के इच्छुक युवाओं और कर्मचारियों के करीब 15 संगठनों के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपे और भर्ती व सेवा संबंधी चिंताएं उठाईं।
सूत्रों के अनुसार, रोजगार से जुड़े मुद्दे सबसे ज्यादा छाए रहे। स्कूल भर्ती रद्द होने से नौकरी गंवा चुके 26,000 उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल ने योग्यता के आधार पर नौकरियां बहाल करने की अपील की।
कुछ अन्य लोगों ने तकनीकी शिक्षा संस्थानों में स्थायी भर्ती फिर से शुरू करने की मांग की और नियुक्ति व सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दे उठाए।
दिन का सबसे मार्मिक पल तब आया, जब भवानीपुर निवासी प्रबीर मुखोपाध्याय (81) मुख्यमंत्री से मिले। उन्होंने गिरफ्तार कारोबारी विश्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ और प्रवर्तक जॉय कामदार से जुड़े कथित जमीन-फ्लैट घोटाले की शिकायत की।
मुखोपाध्याय ने दावा किया कि उन्होंने एक विकास परियोजना के लिए पैतृक जमीन दी थी, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद भी वादे के अनुसार फ्लैट नहीं मिला। पत्नी के साथ किराये के मकान में रह रहे मुखोपाध्याय ने बाद में कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें राहत महसूस हुई।
मुखोपाध्याय ने कहा, ‘‘मुझे राहत मिली। उन्होंने (मुख्यमंत्री) आश्वासन दिया कि मेरे मामले पर ध्यान दिया जाएगा।’’
शुभेंदु दोपहर करीब 12 बजे आधिकारिक कार्यों के वास्ते राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ के लिए रवाना हो गए।
भाषा
खारी पारुल
पारुल
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