नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों से अनुरोध किया कि वे तंबाकू उत्पादों के अवैध कारोबार का अंत करने और अवैध शराब को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
अवैध शराब से आशय सरकारी प्रणाली से बाहर की शराब से है जिस पर कर नहीं चुकाया जाता। इसने आगाह किया कि तंबाकू और शराब के सभी प्रकार, वैध या अवैध, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय निदेशक साइमा वाजेद ने अवैध तंबाकू व्यापार और अवैध शराब की चुनौतियों का समाधान करने के लिए नई दिल्ली में आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला में कहा, ‘‘अवैध तंबाकू व्यापार और अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण एक चुनौतीपूर्ण और कठिन काम है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम विवेकपूर्वक निर्णय लें और आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका चुनें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पहले कदम के रूप में, हमारे शेष सभी सदस्य देशों को तंबाकू उत्पादों में अवैध व्यापार को खत्म करने के लिए डब्ल्यूएचओ ‘एफसीटीसी’ (तंबाकू नियंत्रण पर फ्रेमवर्क संधि) प्रोटोकॉल का पक्षकार बनना चाहिए।’’
डब्ल्यूएचओ के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत और श्रीलंका अब तक डब्ल्यूएचओ ‘एफसीटीसी’ प्रोटोकॉल के पक्षकार हैं।
एक अनुमान के अनुसार, वैश्विक शराब की खपत का 25 प्रतिशत हिस्सा रिकॉर्ड नहीं किया जाता है। यह आम तौर पर कम कीमत का होता है और निम्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले उपभोक्ताओं को पसंद आता है। इसमें अक्सर अज्ञात इथेनॉल प्रतिशत और संभावित विषाक्त यौगिक होते हैं। क्षेत्रीय निदेशक वाजेद ने कहा, इन कारकों में एक जटिल अंत:क्रिया है जो अवैध शराब को विनियमित शराब की तुलना में संभावित रूप से अधिक हानिकारक बनाती है।
वाजेद ने कहा कि तंबाकू का सेवन दिल और सांस से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा उत्पन्न करने के लिहाज से एक अहम कारक है और इससे 20 से अधिक तरह के कैंसर होते हैं।
भाषा संतोष नरेश
नरेश