नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने अपनी पत्नी की हत्या की कोशिश के आरोपी एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में विफल रहा है क्योंकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाही देने से पहले ही शिकायतकर्ता की मौत हो गई थी।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा, अभिनेश त्रिपाठी उर्फ राहुल के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिस पर 2021 में अपनी पत्नी रश्मि की हत्या की कोशिश का आरोप था।
अदालत ने छह जुलाई के आदेश में कहा, ‘‘इस मामले में एकमात्र अहम गवाह यानी शिकायतकर्ता/पीड़िता रश्मि की मौत हो चुकी है और अभियोजन पक्ष ने किसी अन्य गवाह का नाम नहीं बताया है जो आरोपी द्वारा किए गए किसी प्रत्यक्ष कृत्य के बारे में गवाही दे सके।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला अप्रैल 2021 में रश्मि द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पति के कहने पर एक अज्ञात व्यक्ति से बात करने से इनकार करने के बाद उसके पति ने उसके साथ मारपीट की। रश्मि ने शुरू में आरोप लगाया था कि उसके पति ने हॉकी स्टिक से उसे पीटा और जान से मारने की धमकी दी।
त्रिपाठी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या की कोशिश), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अस्पताल में इलाज के दौरान, रश्मि ने एक पूरक बयान दिया जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी नशे की हालत में घर लौटा था, उसने उसे (रश्मि को) जान से मारने की धमकी देते हुए घर की तीसरी मंज़िल से नीचे फेंक दिया; इसके बाद हत्या की कोशिश का आरोप भी मामले में जोड़ दिया गया।
हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान रश्मि को जारी किए गए समन बिना तामील हुए वापस आ गए, क्योंकि वह अपने किराए के मकान को छोड़कर जा चुकी थी। बाद में उसके पिता ने अदालत को सूचित किया कि उसकी मृत्यु हो गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि मृत्यु से पहले रश्मि ने आरोपी के साथ अपने विवाद सुलझा लिए थे, आपसी सहमति से तलाक ले लिया था और उसे आठ लाख रुपये का गुजारा भत्ता मिला था।
अदालत ने गौर किया कि रश्मि इस मामले में एकमात्र अहम गवाह थी और उसका बयान दर्ज नहीं किया जा सका। अभियोजन पक्ष के बाकी सभी गवाह पुलिस के औपचारिक गवाह थे, जिनके बयानों को अगर मान भी लिया जाए तो भी वे आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए काफी नहीं थे।
अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा और आरोपी को बरी कर दिया।
भाषा
सुरभि माधव
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