नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली स्थित गैर-सरकारी वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ ने जंगली जानवरों के शिकार और तस्करी के नेटवर्क में शामिल होने के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि कि उसके पास इन दावों का जवाब देने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
कुछ खबरों में आरोप लगाया गया था कि मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) द्वारा हाल में गिरफ्तार किए गए दो शिकारियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि वे वाइल्डलाइफ एसओएस के निर्देश पर काम कर रहे थे।
एनजीओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘‘यह चौंकाने वाला है और हम इससे बहुत चिंतित हैं। भारत में नाचने वाले भालुओं को बचाने और अंततः इस प्रथा पर प्रतिबंध लगवाने के लिए वर्षों तक किए गए हमारे बेहद सराहनीय प्रयास हमारी कई उपलब्धियों में से एक हैं, जिन पर हमें गर्व है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत के वन्यजीवों और वन संसाधनों के संरक्षक के रूप में हम जीवों की रक्षा, संरक्षण करते हैं और उनके स्वास्थ्य व कल्याण के लिए योजनाएं बनाते हैं।’’
वाइल्डलाइफ एसओएस ने यह भी कहा कि आरोप ‘‘बिल्कुल निराधार’’ हैं और वह किसी भी तरह की जांच में ‘‘पूरी तरह’’ सहयोग कर रहा है तथा उसके लिए तैयार है।
एनजीओ की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने बयान में कहा, ‘‘वन्यजीव अपराध के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं है, लेकिन हम रास्ते में आने वाली चुनौतियों को अपने संकल्प को कमजोर करने नहीं दे सकते।’’
शेषमणि ने कहा, ‘‘हम प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे, वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करेंगे और इस कार्य के लिए खुद को समर्पित करने वाले लोगों के साथ खड़े रहेंगे। हमारी प्रतिबद्धता अटूट है।’’
भाषा जोहेब वैभव
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