LOKSABHA/ image source: ibc24
women reservation bill India: नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयक आज लोकसभा में पेश किए गए, जिस पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कानून मंत्री Arjun Meghwal ने सदन में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से ये बिल पेश किए।
विपक्ष ने इन विधेयकों का जोरदार विरोध किया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर संविधान को “हाइजैक” करने का आरोप लगाया। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा, तब तक इस कानून का कोई मतलब नहीं है। इस पर गृह मंत्री Amit Shah ने स्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना गैर-संवैधानिक है और इसका सवाल ही पैदा नहीं होता। सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर सवाल किया, जिस पर अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि सपा चाहे तो अपने टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं है।
संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें तय की जा सकती हैं। इसके साथ ही सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने विपक्षी दलों के साथ बैठक कर साफ किया कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन परिसीमन बिल और सीट बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध करेंगे, जिसे उन्होंने राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया है।
‘मेडिकल टूरिज्म’ को बढ़ावा देने के लिए अपनी ‘बेड’ क्षमता विस्तार को तेज कर रहा है मैक्स
उप्र: राष्ट्र विरोधी गतिविधि में शामिल होने के आरोप में दो लोग गिरफ्तार, विदेशी संपर्क की जांच शुरू
चीन में कैथोलिक समुदाय पर बढ़ा दबाव, सरकारी गिरजाघर से जुड़ने को मजबूर : रिपोर्ट
ओलंपिक में कोविड-19 टीका लगाने का फर्जी प्रमाणपत्र देने वाला हॉकी कोच बर्खास्त
इजराइल और अमेरिका का लक्ष्य ‘एक जैसा’, हम किसी भी स्थिति के लिए तैयार: नेतन्याहू
आंध्र प्रदेश में सड़क दुर्घटना में आठ श्रद्धालुओं की मौत, मुख्यमंत्री नायडू ने शोक जताया